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हैंडपंपों का पानी पीने से लगा दी रोक, ऐसा पानी पीने से हो सकती है यह बीमारी

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बरेली जिले के मीरगंज  आंवला क्षेत्र के कैंसर प्रभावित करीब दो दर्जन गांवों में हैंडपंपों का पानी पीने पर रोक लगा दी गई है. सीडीओ ने कैंसर प्रभावित गांवों के लोगों से हैंडपंपों का पानी न पीने के लिए शपथ लेटर लेने के आदेश डीपीआरओ को दिए हैं. इन गांवों में लोगों को विश्वास में लेकर हैंडपंपों के हत्थे निकाले जा रहे हैं.

 

प्रशासन ने आर्सेनिक उगलने वाले हैंडपंपों पर लाल निशान लगा दिया है. प्रशासन ने इन हैंडपंपों पर लाल निशान लगाकर छोड़ दिया था. पूर्व में अपने गांव के दूषित जल को लेकर कई बार ग्रामीणों ने अफसरों से शिकायत की थी मगर कार्रवाई कुछ नहीं हुई.

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विधान सभा में उठाया मुद्दा :
मानसून सत्र में मीरगंज के विधायक डीसी वर्मा ने कैंसर प्रभावित गांवों का मुद्दा विधानसभा में उठाया था. पिछले सप्ताह प्रभारी मंत्री श्रीकांत शर्मा की समीक्षा मीटिंग में विधायक ने कैंसर से जूझते ग्रामीणों की दिक्कतें बताई. मंत्री ने महत्वपूर्ण कार्रवाई का भरोसा दिया था. इसके बाद प्रभावित गांवों में उथले हैंडपंपों के पानी पीने पर पाबंदी लगा दी गई है. पानी की जाँच प्रारम्भ कर दी गई है.

रामगंगा का कहर: 
मीरगंज  आंवला में रामगंगा नदी के खादर के किनारे बसे गांवों में कैंसर महामारी में तब्दील होता जा रहा है. नदी के जहरीले पानी के कारण इन गांवों के भूजल बुरी तरह प्रदूषित हो चुका है. जल निगम की जाँच में प्रभावित गांवों के हैंडपंपों के पानी आर्सेनिक  फ्लोराइड की पुष्टि हो चुकी है.

बयान – 
मीरगंज क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांवों में हैंडपंपों के पानी के सैंपल लेकर जाँच के लिए लखनऊ प्रयोगशाला भेजा है. हैंडपंपों के पानी में आर्सेनिक की मात्रा मानक से अधिक होने की संभावना है. ग्रामीणों से हैंडपंप का पानी नहीं पीने को बोला गया है.

-19 गांव मीरगंज  आंवला विकास खंड के कैंसर से प्रभावित हैं.
-एक दशक में दो दर्जन गांवों में 150 से अधिक मृत्यु कैंसर से हो चुकी हैं.
-100 से ज्यादा लोग बीमारी का उपचार करा रहे हैं.

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