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चीन से दोस्ती करना इस देश को पड़ा भारी, अब लगा रहा मदद की गुहार

2018 में जब मालदीव डेमोक्रेटिक पार्टी ने जीत हासिल की और इब्राहिम सोलिह राष्ट्रपति बने। इसके बाद नाशीद दोबारा राजनीति में लौटे। सत्ता में आई सरकार ने जब हिसाब-किताब देखा तो हैरान रह गई।

 

मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति और अब संसद के स्पीकर नाशीद बताते है कि मालदीव पर चीन का 3.1 अरब डॉलर कर्ज हो चुका है। यह कर्जा न सिर्फ सरकार को बल्कि सरकारी कंपनियों और निजी कंपनियों को भी दिया गया, जिसमें गारंटर मालदीव सरकार रही।

नाशीद अब चिंता जाहिर करते हैं कि उनका देश कर्ज जाल में फंस चुका है। उनका कहना है कि जो भी प्रोजेक्ट इन पैसों से शुरू किए गए वे इस लायक नहीं हैं कि कर्ज चुकाने लायक रेवेन्यू जेनरेट कर सकें। उनका तो यह भी कहना है कि कागज पर यह कर्ज असल में प्राप्त हुई राशि से अधिक है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2013 में मालदीव की सत्ता अब्दुल्ला यामीन के हाथों में थी। उन्हें चीन का बेहद करीबी माना जाता था। जिस वजह से उनके कार्यकाल में मालदीव ने अपनी अर्थवयवस्था को सुचारु रूप से चलाने के लिए चीन से बड़े पैमाने पर कर्ज लिया था।

चीन के साथ संबंधों को मजबूत करने के दौरान यामीन ने पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद समेत कई विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया था। बाद में 2018 के चुनाव में अब्दुल्ला यामीन को हार मिली।

भारत का पड़ोसी देश मालदीव चीन की कर्जजाल नीति में फंसता नजर आ रहा है। दरअसल, मालदीव के सर ड्रैगन ने इतना कर्ज का बोझ लाद दिया है कि अब उसे भी श्रीलंका की तरह बहुत कुछ खोने का डर सताने लगा है।

जानकारी के मुताबिक मालदीव पर चीन का 3.1 अरब डॉलर बकाया है, जबकि उसकी अर्थव्यवस्था महज 4.9 अरब डॉलर की है। पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था वाला देश कर्जजाल नीति की वजह से बर्बादी के शिखर पर खड़ा नजर आने लगा है।

 

 

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