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ब्लैक फंगस के इलाज के दौरान मिलेगा ये , केंद्र सरकार ने कहा…

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एडवाइजरी में कहा गया है कि म्यूकोर्मिकोसिस का मैनेजमेंट सर्जिकल डिब्राइडमेंट से शुरू होना चाहिए. देश में अब तक ब्लैक फंगस के करीब 29 हजार से ज्यादा मामले सामने आए हैं.

जिनमें से ज्यादातर में ये इंफेक्शन कोविड के बाद फैला. एडवाइजरी में कहा गया है कि एम्फोटेरिसिन बी (एएमबी) दवा दो प्रकार की होती है- लिपोसोमल एम्फोटेरिसिन और डॉक्सिचोलेट एम्फोटेरिसिन. दोनों का प्रभाव एक जैसा, लेकिन बाद वाली दवा किडनी के लिए ज्यादा खतरनाक होती है.

रिपोर्ट के मुताबिक हाईकोर्ट ने कहा कि देश को अपने भविष्य, युवाओं की सुरक्षा करने की जरूरत है, जबकि बुजुर्गों ने अपना जीवन जी लिया है, और सभी को दवा उपलब्ध कराना संभव नहीं है, क्योंकि जरूरत की एक तिहाई दवा ही उस वक्त मौजूद थी.

कोविड-19 पर नेशनल टास्क फोर्स द्वारा 3 जून को भेजी गई एडवाइजरी में कहा गया है कि युवा रोगियों के बाद एएमबी के प्रशासन की दूसरी प्राथमिकता उन रोगियों की होनी चाहिए, जिनमें सर्जिकल डीब्राइडमेंट संभव नहीं है. ये एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है साथ ही कम से कम एक आंख को बचाया जा सकता है.

केंद्र ने राज्य सरकारों से हाई डेथ रेट वाली बीमारी ब्लैक फंगस (Black Fungus) के इलाज में युवा पॉपुलेशन को प्रथामिकता देने को कहा है. कोविड-19 के लिए बनाई गई टास्क फोर्स की राज्यों को जारी की गई एडवाइजरी की कॉपी में इस संबंध में कई अन्य दिशा-निर्देशों का भी जिक्र किया गया है. दिल्ली हाईकोर्ट ने 1 जून को केंद्र से कहा कि वह एम्फोटेरिसिन बी दवा देने के लिए ज्यादा उम्र के लोगों की तुलना में युवा आबादी को प्राथमिकता दें.

 

 

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