लद्दाख में बना 4 KM का ये, 24 घंटे के भीतर सेना को…

एक तीसरे अधिकारी ने कहा सेना द्वारा शुरू की गई सत्यापन प्रक्रिया में UAV, निगरानी के अन्य हवाई साधन और क्षेत्रों की सैटेलाइट इमेजरी शामिल हैं.

 

भारतीय वायु सेना (IAF) पहले ही दिन-रात, लद्दाख में सभी मौसम से निपटने के अभियानों को अंजाम देने की अपनी क्षमता का अनुमान लगा रही है, जिसमें फ्रंट-लाइन फाइटर जेट्स, अटैक हेलीकॉप्टर और मल्टी-मिशन हेलिकॉप्टर शामिल है.

सेना के ही एक दूसरे अधिकारी ने कहा कि दोनों सेनाओं ने पहले ही गलवान घाटी में 4 किमी के बफर जोन बना लिया है. बता दें गलवान में ही 15-16 जून को हुई झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे.

बफर जोन बनने के बाद क्षेत्र में दोनों सेनाओं की गश्त गतिविधियों पर अस्थायी रूप से रोक लगेगी. हालांकि कुछ विशेषज्ञों ने इसे एक आवश्यक कदम माना.

वहीं अन्य ने चेताया कि गश्त अधिकारों पर अस्थायी रोक के बाद लंबे समय तक वहां भारतीय सेना की मौजूदगी और नियंत्रण ना कम होने पाए.

एक अन्य अधिकारी ने नाम ना प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि सेना पीएलए की वापसी पर कड़ी नजर रख रही है. भविष्य में किसी भी अचरज से बचने के लिए डिसएंगेजमेंट की हर प्रक्रिया को वेरिफाई करना जरूरी है.’

बफ़र बनने और गश्त लगाने की प्रक्रिया पर विशेषज्ञों ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी. उत्तरी सेना के पूर्व कमांडर रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा ने कहा कि ‘ यह प्रक्रिया भविष्य में किसी हिंसक झड़प की संभावना को खत्म कर देंगे. दोनों देशों के सैनिकों के बीच किसी भी प्रकार के संपर्क से बचना सबसे अच्छा है. जब तक चीजें स्थिर नहीं हो जातीं, तब तक दोनों तरफ के इलाकों में गश्त करने की मोहलत होनी चाहिए.’

पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीनी सेना की वापसी पर निगरानी के लिए भारतीय सेना कड़ी नजर बनाए हुए है. पूरे घटनाक्रम से परिचित चार अधिकारियों ने बताया कि दोनों सेनाएं 24 घंटे के भीतर सैनिकों के बीच 4 किलोमीटर का बफर जोन बनाने का काम कर रही हैं.

चीनी सेना PLA ने पैट्रोलिंग पॉइंट 15 (हॉट स्प्रिंग्स) से 2 किलोमीटर तक पीछे हटा है और बुधवार शाम तक पीपी -17 (गोगरा) से भी पीछे हट जाएगा. इसी अनुपात में भारतीय सेना के सैनिक भी पीछे हटे हैं.