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देश हित के कारण इन नेताओं पर चला मोदी सरकार का चाबुक, अगर नहीं मानी ये बात तो…

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घाटी में आर्टिकल 370 को मोदी सरकार ने कानून बनाकर 43 दिन पहले खत्म घोषित कर दिया था। उसके बाद से अभी तक सरकार की प्राथमिकता लिस्ट में शांति बहाली सबसे ऊपर है।

सरकार कानून व्‍यवस्‍था से किसी भी कीमत पर समझौ़तावादी रुख अख्तियार करने के मूड में नहीं है। इसलिए कश्मीर में नजरबंद़ महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला समेत कई नेताओं की रिहाई तत्‍काल होना मुश्किल है।

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प्रमुख नेताओं की रिहाई के लिए सरकार की तरफ से शर्त ये है कि जो नेता नजरबंदी से मुक्ति़ चाहते हैं, उन्‍हें एक शपथ पत्र पर हस्‍ताक्षर करने होंगे। इसके बिना रिहाई मुश्कि़ल है।

शपथ पत्र के पीछे सरकारी एजेंसियों का लक्ष्य ये है कि रिहाई के बाद नजरबंद़ नेता घाटी में अशांति को बढ़ावा नहीं देंगे। इस मुद्दे पर नेताओं से सहयोग पाने के लिए विभिन्न स्रोतों से संपर्क किया गया है। उनकी नजदीकी रिश्ते़दारों और नेताओं से मेल मुलाकात का दौर चल रहा है।

दूसरी ओर सुरक्षा एजेंसियों से मिले फीडबैक के आधार पर मोदी सरकार ने तय किया़ है कि सुरक्षा से किसी भी हालत में समझौ़ता नहीं किया जाएगा। खुफिया रिपोर्ट में जताई गई आशंकाओं की वजह से अभी इन नेताओं की रिहा़ई में देरी हो सकती है। सुरक्षा बल और सरकारी एजेंसियों के सहयोग की वजह से कश्मीर में अधिकतर हिस्सों में अमन चैन का माहौल है।

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