चीन रच रहा इस देश के खिलाफ साजिश, तेजी से बढ़ा रहा अपनी सेना

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इधर आस्ट्रेलिया के बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव का समझौता रद्द करने के बाद चीन की इस परियोजना को गहरा धक्का पहुंचा है। अब अन्य देश भी इस परियोजना पर अपने समझौते पर विचार कर रहे हैं।

जर्मन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल एंड सिक्योरिटी अफेयर के हेरीवर्ट डाइटर ने कहा है कि ऑस्‍ट्रेलिया के समझौता रद करने से चीन की इस परियोजना की छवि को गहरा धक्का पहुंचा है जिसका नुकसान चीन को होगा।

अफ्रीका के ये देश अन्य तरीके से भी चीन से सहायता भी ले रहे हैं। अफ्रीका के कई देशों को चीन सेना और पुलिस की ट्रेनिंग भी करा रहा है। खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान भी कर रहा है।

BRI के माध्यम सक्रिय होने के बाद चीन अब यहां परियोजना के साथ ही सैन्य शक्ति बढ़ाने के इरादे से सक्रिय हो गया है। इससे अमेरिका और पश्चिमी देशों की चिंता बढ़ती जा रही है।

पिछले साल अमेरिका ने खुशहाल अफ्रीका योजना चलाते हुए यहां निवेश के अवसर तैयार किए थे। यूरोपीय यूनियन भी अफ्रीका में निवेश और व्यापार बढ़ाने के प्रयासों लग गई है।

चीन अपनी महत्वकांशाओं को पूरा करने के लिए कई देशों को निशाना बना चुका है। ड्रैगन का अगला शिकार अब अफ्रीका है जहां वह अपनी बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव (BRI) परियोजना के माध्यम से घुसपैठ करना चाहता है।

BRI की आड़ में चीन अफ्रीकी महाद्वीप में अपनी सेना बढ़ाने की फिराक में है। उसने अफ्रीका के देश जिबूती में चल रही परियोजना में सुरक्षा के नाम पर सेना की तैनाती की थी।

अब वह यहां सेना की मौजूदगी को बढ़ा सकता है। अफ्रीका में चीनी हितचिंतकों का मानना है कि चीन यहां अपनी परियोजनाओं और उसमें काम करने वाले नागरिकों को सुरक्षा देने के लिए ऐसा कर रहा है जबकि दुनिया के विश्लेषकों का कहना है कि ये चीन की चाल का हिस्सा है।

 

 

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