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लोगों को सफाई का महत्व बताने वाले बापू ने कुछ इस तरह लोगो को पढाया स्‍वच्‍छता का पाठ

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महात्‍मा गांधी ने भी दुनियावालों को स्‍वच्‍छता का महत्‍व सिखाया था  आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि उन्होंने कैसे सिखाया स्‍वच्‍छता का महत्‍व जी दरअसल यह बात उन दिनों की है, जब बापू वर्धा से सेवाग्राम चले गए थे वहां उन्होंने आसपास के ग्रामीणों से सम्पर्क करना शुरुआत कर दिया वह प्रतिदिन उन लोगों को सफाई का महत्व बताते  नियमित रूप से वहां सफाई भी करते कभी वहां की गलियों में झाड़ू लगवा देते तो कभी कुछ बच्चों को स्नान कराते यहां तक कि बापू उनके गंदे कपड़े को खुद अपने हाथों से धोने में भी संकोच नहीं करते थे ऐसा करते हुए बापू के तीन महीने हो गए लेकिन वहां के लोगों में स्वच्छता  सफाई के प्रति कोई लगाव नजर नहीं आया वे मैले-कुचले कपड़ों में ही घूमते रहते थे

बापू के साथ आए कार्यकर्ता यह सब देख रहे थे एक दिन एक कार्यकर्ता ने कहा, ‘बापू! आपको इन लोगों की सेवा करते हुए महीनों बीत गए, पर कोई परिणाम दिखाई नहीं देता अपनी सफाई तो छोड़ो, ये अपने बच्चों को भी साफ-सुथरा नहीं रखते वे गंदा पहनते हैं, गंदा खाते हैं यदि आपने खुद उन्हें साफ कपड़े पहना दिए या अच्छा भोजन करा दिया तो ठीक, अन्यथा वे गंदगी में ही पड़े रहेंगे, वैसे ही खाएंगे उन्हें जैसे कोई फर्क ही नहीं पड़ता ’ कार्यकर्ता की बात सुनकर बापू बोले, ‘बस इतने में संयम खो दिया, अरे भाई जिन ग्रामीणों की हम सदियों से उपेक्षा करते आए हैं उनकी कुछ सालों तक तो नि:स्वार्थ सेवा करनी ही होगी

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आपको संयम से कार्य लेना होगा नवनिर्माण में किसी करिश्मा की आशा नहीं करनी चाहिए आज भले ही स्वच्छता के प्रति उनके मन में उपेक्षा का भाव हो, पर एक दिन ऐसा जरूर आएगा, जब सफाई इनके ज़िंदगी का अंग बन जाएगी ’ कार्यकर्ताओं ने गांधी जी की बात पर अपनी सहमति दिखाई  वे पूरी लगन, निष्ठा  नवनिर्माण का सपना संजोकर वहां सफाई अभियान में जुट गए इसी का नतीजा रहा कि कुछ दिनों बाद उसका सकारात्मक परिणाम भी दिखने लगा

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