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अजीब है इस विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी, जहाँ एसी में बैठकर किताबें पढने के बजाय…

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कर्नाटक के एक विश्वविद्यालय ने कैंपस में ग्रीन लाइब्रेरी बनाई है ताकि छात्र अपना ज्यादा से ज्यादा समय किताबें और जनरल पढ़ने में दे सकें।प्रोफेसर बीपी वीरा भद्रप्पा ने बताया कि इस आइडिया से बच्चों की इंटरैक्टिव वातावरण में पढ़ने में मदद मिलेगी। हमने इसे इस विचार के साथ बनाया है कि ये छात्रों को आपस में एक दूसरे के साथ बातचीत करने के लिए प्रेरित करेगा। वे स्वस्थ वातावरण में ज्यादा सीखेंगे।

बातचीत करते हुए छात्रों के अपने विचारों का विकास होगा। छात्रों को दवाब महसूस नहीं करना चाहिये लेकिन उन्हें सीखने के मकसद के साथ पढ़ना चाहिये।

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एक छात्र चंदन ने बताया कि कुवेम्पु विश्वविद्यालय ने ये आइडिया कन्नड़ लेखक और जननपिता अवार्डी कुवेम्पु से अपनाया है जो इस क्षेत्र से आते हैं। उन्होंने हरे-भरे पेड़ों में अपनी पढ़ने की आदत का विकास किया। यह भारत का एकमात्र ऐसा विश्वविद्यालय है जो घने वनों से घिरा हुआ है। सामान्य पुस्तकालय में पढ़ाई करना उबाऊ है, अब हम यहां किताबें ला सकते हैं।

एक दूसरी छात्रा अमृता ने बताया कि हम खुली जगह में पढ़ने का आनंद ले रहे हैं और छत के नीचे पढ़ना उबाऊ था। हम मोबाइल, लैपटॉप के जरिए ई-लाइब्रेरी तक पहुंच सकते हैं। हम परीक्षा के दौरान शाम के 7 बजे तक यहां रहते हैं। सुरक्षा अधिकारी हर चीज पर निगरानी रखते हैं और हमे होस्टल तक छोड़ते हैं। विश्वविद्यालय स्वच्छता बनाए रखता है। ग्रुप डिस्कशन के लिए ओपन लाइब्रेरी सबसे बेहतर हैं।

इतना ही नहीं इस पार्क में ई-लाइब्रेरी के लिए फ्री वाई-फाई की सुविधा भी है साथ ही यहां पर सामान्य लाइब्रेरी से पुस्तकें उधार लेकर आ सकते हैं। इस बीच यहां पर सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम हैं। पार्क में ऊंचे पेड़, तालाब और अन्य चीजें बच्चों को ज्ञान हासिल करने के साथ प्रकृति के साथ आनंद लेने के लिए एक सुंदर वातावरण भी देती हैं।

इसका एक फायदा ये भी है कि इससे बच्चे पेड़-पौधों के बीच भी हर दिन कुछ समय बिता पाएंगे और ये बात रिसर्च में साबित हो चुकी है कि इनके साथ समय बिताने से हम कई तरह की बिमारियों से बचे रहते हैं। इस तरह से हम एक बौद्धिक और स्वस्थ युवा तैयार कर पाएंगे।

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