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महिलाओं के बाल कटने और फिर बेहोश हो जाने वाले कांड का हुआ खुलासा, सीसीटीवी में कैद हुआ ये नज़ारा

राजस्थान में महिलाओं के बाल कटने का जो सिलसिला प्रारम्भ हुआ था वो अब दूसरे राज्यों तक जा पहुंचा है. बाल काटने की खबरों की अब जैसे बाढ़ आ गई है. राजस्थान के बाद अब हरियाणा, दिल्ली, यूपी और  मध्यप्रदेश से भी इस तरह की कई  खबरें सामने आ रही हैं. इस दौरान कई  महिलाएं बेहोश भी हो गई .

 

हालांकि मनोविज्ञान इस मुद्दे को एक अलग धरातल पर ले जाता है और इसे अफ़वाह करार देता है, जिसे लोग हकीकत मान लेते हैं. इसके कारण ही वो स्थिति पैदा होती है जिसके चलते हर कोई  इसकी चपेट में आ जाता है. मनोविज्ञान का मानना है कि मौखिक या फिर कुछ अन्य जरियों से ये अफवाहें लोगों तक पहुंचती है और  हर कोई  इसे हकीकत मानने लगता है.

मनोविज्ञान में इस तरह की घटनाओ  को मास हिस्टीरिया और मास सोशियोजेनिक इलनेस कहते हैं. इसमें लोग अपना पूरा ध्यान एक तरह के काल्पनिक घटनाक्रम पर फोकस कर देते हैं और इसी के चलते भ्रामक स्थिति पैदा होती है, जिसके बाद पूरा का पूरा समाज इस तरह की घटनाओ  को हकीकत मान लेता है.

इस तरह की घटनाओ  के इतने बड़े पैमाने पर फैलने का भी एक अलग कारण है. ये घटनाएं आकस्मित से इतनी बड़ी संख्या में लोगों को ले लेती हैं क्योंकि इन्हें बहुत ज्यादा संवेदनशील बनाकर पेश किया जाता है. बहुत ही छोटी या फिर सामान्य सी बात को बेहद भावुक और काल्पनिक कथाओ  के साथ नया आकार दिया जाता है. साथ ही इन बातों को नमक मिर्च के साथ पेश किया जाता है. इसके चलते एक आम आदमी खुद को बचा नहीं पाता है और इस तरह की घटनाओ को हकीकत मानकर खुद भी अफवाहों के साथ बहने लगता है.

ऐसी  अफवाहों में कुछ लोग अपना उल्लू भी सीधा करने लगते हैं और इनके चलते भी ऐसी  अफवाहों को बल मिलता है. ऐसी  ही घटना करौली के एक व्यक्तिगत अस्पताल में सामने आई  जहां पर एक महिला सफाईकर्मी ने छुट्टी के लिए खुद के बालों की चोटी काट ली. हालांकि ये पूरा मुद्दा सीसीटीवी में कैद हो गया और महिला पकड़ी गई .

अगर हम देखें तो कुछ वर्षों पहले मंकी मैन और मुंह नोचवा जैसी अफवाहें इसी तरह से फैली थी. उस वक्त लोग घरों के बाहर पहरा देने और छत पर सोने के बजाय बंद कमरों में सोने लगे थे. हालांकि वक्त गुजरने के साथ ये अफवाहें इस तरह से बंद हो गई  जैसे कभी थी ही नहीं. आज उनकी चर्चा तक नहीं है.

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