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ग्लोबल वॉर्मिंग की गंभीर परेशानी नासा को लेकर नासा ने किया खुलासा, पूरी दुनिया में फैली ख़ुशी की लहर

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विश्वभर में इस समय ग्लोबल वॉर्मिंग एक गंभीर परेशानी बन चुकी है॰ इसी बीच NASA से एक अच्छी खबर आ रही है॰ दरअसल, ग्लोबल लेवल पर बढ़ रहे तापमान के बीच ये खुलासा हुआ है कि ओजोन का छेद इस समय अब तक का सबसे छोटे आकार में है॰ इस बारे में NASA ने पुष्टि की है॰

NASA के मुताबिक, बीते 37 वर्षों में ओजोन का सबसे छोटा छेद रिकॉर्ड किया गया है॰ आपको बता दें कि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ओजोन के छेद के आकार पर 1982 से नजर बनाए हुए है॰ तब से लेकर इस बार ओजोन के छेद का आकार काफी घट गया है॰ आपको बता दें कि अंटार्कटिका के ऊपरी वायुमंडल में असामान्य मौसम के पैटर्न के कारण 1982 से वैज्ञानि़कों ने इसकी निगरानी शुरू की थी

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ओजोन के छेद में प्रति वर्ष उतार-चढ़ाव दर्ज किया जाता है॰ अधिकतर ये बदलाव दक्षिणी गोलार्द्ध में सबसे ठंडे महीनों में देखा जाता है॰ फिलहाल, NASA से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, ओजोन की परत में छेद अब 3.9 मिलियन (39 लाख) वर्ग मील से कम का रह गया है॰ वैज्ञानिकों का कहना है कि सिर्फ 6 हफ्ते पहले 8 सितंबर को ही इस छेद का आकार 6.3 मिलियन (63 लाख) वर्ग मील दर्ज किया गया था, जो इस बार की ऑबजर्वेशन में से दोगुना था

कुछ विशेषज्ञों ने कहा कि साल के इस वक्त में ये छेद आमतौर पर करीबन 8 मिलियन वर्ग मील के आकार का होता है॰ NASA के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर में अर्थ साइसेंस के मुख्य वैज्ञानिक पॉल न्यूमैन ने बताया कि दक्षिणी गोलार्द्ध में ओजोन के लिए ये एक बहुत अच्छी खबर है हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने ये भी बताया इस बात का ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि इस साल हम जो देख रहे हैं वो गर्म समताप मंडल (वॉर्मर स्टार्टोस्फेरिक टंप्रेचर) के तापमान के कारण है॰ इसलिए, ओजोन में छेद की कमी को रिकवरी का संकेत नहीं माना जा सकता है

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