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रूस की कोरोना वैक्सीन को लेकर सामने आया ये बड़ा सच , वैज्ञनिकों ने बताया…

अमरीका में 1955 में गलत पोलियो वैक्सीन लगाने का मुद्दा सामने आया था. रिपोर्ट में बताया गया है कि अमरीकी वैज्ञनिकों को वैक्सीन के परीक्षण के दौरान ये बात पता चल गई थी कि वैक्सीन में वायरस जिंदा है, लेकिन जल्दबाजी के चक्कर में उन अधिकारियों तक ये बात नहीं पहुंचाई जा सकी जिन कंपनियों को वैक्सीन बनाने का लाइसेंस दे रहे थे.

 

इसके बाद जब वैक्सीन बनकर मार्केट में आया व बच्चों को इसका टीका लगाया गया, तो पोलियो के रहस्मय मुद्दे सामने आए. इससे सरकार भी दंग रह गई व सभी वैक्सीन को फौरन वापस मंगाने का निर्णय किया. जब तक यह प्रक्रिया पूरी होती तब तक बहुत ज्यादा देर हो चुकी थी.

चूंकि इससे पहले अमरीका में एक बार जल्दबाजी के कारण वैक्सीन के गंभीर और खतरनाक परिणाम देखने को मिल चुका है. वैक्सीन लगाने से 40 हजार बच्चे बीमार हो गए थे.

रूस व चाइना पर आरोप है कि सियासी दबाव व दुनिया में पहला वैक्सीन बनाने का श्रेय लेने के लिए जल्दबाजी में कोरोना वैक्सीन को लॉंच कर दिया गया है. अब कई एक्सपर्ट ने ये चेतावनी दी है कि इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं व नुकसानदायक साबित होने कि सम्भावना है.

कोविड-19 महामारी से पूरी दुनिया जूझ रही है व इससे बचाव के लिए तमाम राष्ट्रों में वैक्सीन बनाने पर कार्य किया जा रहा है. अभी तक विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से मान्यता प्राप्त कोई भी वैक्सीन नहीं बन पाया है.

लेकिन रूस, चाइना की ओर से अपने-अपने देश में कोरोना वैक्सीन बन जाने की घोषणा कर दी है. इतना ही नहीं, इसका प्रयोग भी प्रारम्भ किया गया है. हालांकि WHO व अन्य राष्ट्रों ने वैक्सीन की प्रमाणिकता को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं.

 

 

 

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