Wednesday , January 29 2020 22:56
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उत्तराखंड में पंचायतों को सशक्त करने के बड़े-बड़े दावों के बीच प्रदेश में संविधान के जरिए किया गया ये…

पंचायतों को सशक्त करने के बड़े-बड़े दावों के बीच प्रदेश में संविधान के जरिए सौंपे गए अधिकारों में से एक भी अधिकार पंचायतों को नहीं सौंपा गया। ये ही वे अधिकार हैं, जिनकी बदौलत स्थानीय स्तर पर पंचायतें शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य विभाग तक पर निगाह रखतीं और स्थानीय जरूरतों के हिसाब से उपयोग कर पातीं।

वर्तमान में पंचायतों को कई अधिकार हैं, लेकिन शिक्षा, पेयजल, स्वास्थ्य आदि मूलभूत जरूरतों के लिए उन्हें सरकार की ओर देखना पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्र में स्थापित प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय पर शिक्षा विभाग का अधिकार है। पेयजल की व्यवस्था पेयजल विभाग करता है और स्वास्थ्य विभाग के अधीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। स्कूल में शिक्षक न हों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सक न हों तो ग्राम पंचायत ऐसी स्थिति में सिर्फ शिकायत ही कर सकती है। पंचायतों पर सरकारी विभागों के अधिकार को तोड़ने के लिए ही 73वें संविधान संशोधन के जरिए पंचायतों को 29 विषय सौंपे गए थे।

प्रदेश में इन 29 विषयों में से मात्र 14 के लिए ही विभागीय स्तर पर एक्टिविटी मैपिंग हो पाई। इस एक्टिविटी मैपिंग से यह स्पष्ट होना था कि ग्राम पंचायत के अधिकार क्षेत्र में सरकारी विभाग क्या करेंगे और पंचायतों को किस हद तक अपने अधिकारों के उपयोग की स्वतंत्रता होगी। यह एक्टिविटी मैंपिंग भी लागू नहीं हो पाई।

ये हैं पंचायतों के अधिकार, जो लागू नहीं हुए कृषि एवं कृषि विस्तार, भूमि सुधार, चकबंदी, लघु सिंचाई, जल संग्रहण क्षेत्र का विकास, जल व्यवस्था, पशुपालन, डेयरी एवं मुर्गी पालन, मछली पालन, सामाजिक वानिकी, वन उपज, लघु उद्योग, खादी एवं कुटीर उद्योग, ग्रामीण आवास, पेयजल, ईंधन एवं चारा, सड़क, पुलिया, पुल आदि, ग्रामीण विद्युतीकरण एवं सप्लाई, गैर परंपरागत ऊर्जा स्रोत, गरीबी उन्मूलन के कार्य, प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा, तकनीकी एवं व्यवसायिक शिक्षा, प्रौढ़ शिक्षा, पुस्तकालय, सांस्कृतिक कार्यक्रम, मंडियां एवं मेले, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, महिला एवं बाल कल्याण, समाज कल्याण, अनुसूचित जाति एवं जनजातियों का कल्याण, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, सार्वजनिक संपत्तियों का रख रखाव।
(संविधान की 11वीं अनुसूची के अनुसार, जिन्हें संविधान के 73वें संशोधन के जरिए लागू किया गया)

क्या हुआ अब तक
पंचायतों को 29 विषयों का अधिकार देने की अभी तक गंभीर कोशिश नहीं की गई। प्रदेश में इन में 14 विभागों की एक्टिविटी मैपिंग तो हुई, लेकिन संबंधित विभागों की नियमावलियोें में बदलाव नहीं किया गया। दरअसल एक्टिविटी मैपिंग के जरिये ही पंचायतों को विभागों पर असल अधिकार मिलना है।

पंचायत चुनाव के बाद इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाएगा। अभी तक किसी भी सरकार ने पंचायतों को उनके संविधान प्रदत्त अधिकार देने की कोई गंभीर कोशिश नहीं की। हाल तो यह हुआ कि खुद पंचायतों को भी कभी इस विषय पर जागरू क नहीं किया जाता।

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