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बच्चों के दूध के दांत बेकार होने से रोके करे यह उपाए

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ताजनगरी का पानी बच्चों के दांत बेकार कर रहा है. उनके दांत पीले हो रहे हैं. मुंह से बदबू आती है. तमाम बच्चे फ्लोरोसिस से पीड़ित हो रहे हैं. कई बार तो बच्चों के दूध के दांत भी बेकार होने के केस आने से डॉक्टर दंग हो रहे हैं. एसएन मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में प्रतिदिन 10 से 15 फीसदी बच्चे सिर्फ इसी प्रकार के रोगों से पीड़ित होकर आ रहे हैं. 

एसएन मेडिकल कॉलेज के दंत रोग विभाग में रोज औसतन 110 मरीज आते हैं. इनमें से 10 से 20 कम आयु के बच्चों में दातों के रोग मिल रहे हैं. चिकित्सकों का बोलना है कि इन्हीं रोगों के चलते बच्चों के दूध के दांत भी समय से पहले टूट रहे हैं. अधिकतर बच्चों के दातों में बैक्टीरिया (फ्लोरोसिस) पाया गया है.

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यह समस्या अधिकांशत: मध्यम, निम्न मध्यम या ग्रामीण परिवारों के बच्चों में ज्यादा पाई जा रही है. इनके दांत पीले हो रहे हैं. कुछेक के दांतों में सफेद निशान भी मिल रहे हैं. दांतों के बेकार होने से बच्चों के विकास पर सीधा असर पड़ रहा है.

भूमिगत जल बड़ा कारण – 
डॉक्टरों के मुताबिक, बच्चों में दंत रोगों का मुख्य कारण शहर का भूमिगत जल है. पानी के कारण दंत क्षय यानि डेंटल कैरिज दांतों के इनेमल पर एसिड बनने के कारण होता है. एसिड तब बनता है, जब दांत की सतह पर प्लाक में उपस्थित बैक्टीरिया के साथ खाद्य पदार्थ या पेय पदार्थ में उपस्थित शुगर (मुख्य रूप से सुक्रोज) रिएक्शन करते हैं. यह एसिड इनेमल में कैल्शियम  फॉस्फेट की कमी के कारण बनता है. इस प्रक्रिया को डिमिनरलाइजेशन बोला जाता है.

दांतों में सुराख कर रहा बैक्टीरिया-
बैक्टीरिया एसिड को पैदा करता है. इससे दांतों में छोटे-छोटे छेद हो रहे हैं. यह दंत क्षय का पहला चरण है. डाक्टर कहते हैं कि इन हालातों में बच्चों का ठीक समय पर उपचार करवा लेना चाहिए. अन्यथा एसिड दांतों में घुसकर अंदर से नष्ट कर देता है. भविष्य में बड़ी कठिनाई हो सकती है.

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