Tuesday , December 10 2019 0:10
Breaking News

यह प्लान बना रहे है अध्यक्ष अखिलेश यादव

लोकसभा चुनाव में शिकस्त खाने के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) अब अपने छिटके मूल वोट बैंक को सहेजने में जुट गई है. वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव को लक्ष्य बनाकर चल रहे पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव को सपा के मूल वोट बैंक यादव की एकजुटता बनाए रखना महत्वपूर्ण लग रहा है. यही वजह है कि पुष्पेंद्र मुठभेड़ काण्ड के बाद झांसी का दौरा कर उन्होंने सरकार को घेरने के साथ अपने वोट साधने का भी संदेश दिया है.

लोकसभा चुनाव में बीएसपी से गठबंधन करने के बाद भी वांछित परिणाम नहीं मिलने  यादव पट्टी के वोट भी छिटकने के बाद सपा ने मूल वोट बैंक को साधने की एक्सरसाइज़ प्रारम्भ कर दी है. रूठे हुए यादव नेताओं को मानने की कवायद प्रारम्भ की गई है. उसी क्रम में आजमगढ़ के पूर्व सांसद रमाकांत यादव को पार्टी में शामिल कराकर पूर्वांचल के यादवों को साधने का एक बड़ा कोशिश किया गया है. रमाकांत 1991 से लेकर 1999 तक सपा से विधायक  सांसद चुने जाते रहे हैं. उधर, परिवार में एकता की कोशिशों में एक धड़ा तेजी से लगा हुआ है, पर वह कितना सफल होगा, यह तो वक्त ही बताएगा. पार्टी मुस्लिम  यादव का गणित मजबूत करना चाहती है. इसीलिए पार्टी ने मुस्लिम नेताओं को भी बैटिंग करने को मैदान में उतारा है.

वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि यादवों में एकता रहेगी तो एम-वाई (मुस्लिम-यादव) समीकरण का रंग भी गाढ़ा हो सकेगा. इस बीच, शिवपाल सिंह यादव के नेतृत्व वाली प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के पैंतरे ने सपाइयों की रणनीति में जरूर हड़कंप मचा रखी है. अखिलेश के झांसी दौरे से एक दिन पूर्व शिवपाल के पुत्र आदित्य यादव और अन्य नेताओं ने भी पुष्पेंद्र के घर जाकर पीड़ित परिजनों से मुलाकात की थी. शिवपाल को साधना  उनके सहारे भी यादव वोट बैंक को संजोना अखिलेश के लिए बड़ी चुनौती है.

वरिष्ठ सियासी विश्लेषक प्रेमशंकर मिश्रा का बोलना है, “लोकसभा चुनाव में जिस प्रकार फिरोजाबाद, इटावा, बदायूं, बलिया, जैसी यादव पट्टी की सीटें, जिसे सपा का गढ़ माना जाता था. वहां पर चुनाव हारना सपा के लिए घातक रहा है. सपा का मूल वोट बैंक इस चुनाव में बहुत ज्यादा छिटका है. सपा संरक्षक मुलायम का निष्क्रिय होना  शिवपाल का दूसरी पाटीर् बना लेना भी बहुत ज्यादा हानिकारक रहा है. इसीलिए अखिलेश अब इसे साधने में लगे हैं. वह एम-वाई कम्बिनेशन को भी दुरुस्त करने में जुट गए हैं.

एक अन्य विश्लेषक राजीव श्रीवास्तव का बोलना है, “लोकसभा चुनाव में जिस तरह बीजेपी को करीब 50 से 51 फीसदी का वोट शेयर मिला है, इसमें सभी जातियों का वोट समाहित है. अभी तक दलित कोर वोट जाटव कहीं नहीं खिसका, इसी कारण मायावती निश्चिंत हैं. बीजेपी ने सभी जातियों के वोट बैंक में सेंधमारी की है. अखिलेश के सामने छिटके वोट को अपने पाले में लाना बड़ी चुनौती है. इसी कारण रमाकांत यादव को शामिल किया गया है. उनके पास पूवार्ंचल का बड़ा वोट बैंक है. सपा जाति आधारित पॉलिटिक्स करती रही है. अगर ये वोट खिसक गए तो संगठन को खड़ा करना भी कठिन होगा. इसीलिए अखिलेश यादव वोट बैंक को साधने में लगे हैं.

उन्होंने कहा, “मुलायम सिंह एक ऐसे नेता थे, जिन्हें यादव वोटर अपने अभिभावक के तौर में देखते थे. वह योजनाएं बनाने  अन्य जगहों पर यादवों का ख्याल रखते थे. उसके बाद अगर किसी का नाम आता है तो वह है शिवपाल का. वह कार्यकतार्ओं में भी प्रिय रहे हैं. वह अपने वोटरों की चिंता करते थे. इसीलिए ये दोनों जमीनी नेता माने जाते हैं.” श्रीवास्तव ने बोला कि अखिलेश ने जमीनी पॉलिटिक्स नहीं की है, इसीलिए उन्हें परेशानी हो रही है. उन्हें युवाओं के साथ पुराने समाजवादियों को भी अपने पाले में लाना होगा.

Share & Get Rs.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!