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कोरोना से ठीक होने वाले मरीजो को हो सकती है ये बिमारी, कई देशों में दिखा…

जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में जर्नल ऑफ अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन ने एक सैंपल की स्टडी में पाया गया कि कोरोना से रिकवर 78 फीसदी मरीजों में दिल से जुड़ी समस्याएं सामने आई हैं. इन सभी की उम्र 40 से 50 साल के बीच में है और कोरोना पॉजिटिव होने से पहले सभी एक दम स्वस्थ थे.

 

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण कहते हैं कि भारत में अब तक पोस्ट-कोविद सिंड्रोम के मामलों का पता नहीं लग है, लेकिन अन्य देश पहले से ही एक उभरते स्वास्थ्य संकट के लिए तैयारी कर रहे हैं. ये सभी पोस्ट-कोविद सिंड्रोम के मामलों को एक अज्ञात वायरस मान कर, साइंटिफिक तरीकों से इसके मामले रिकॉर्ड कर रहे हैं.

दुनिया भर के अस्पतालों में बच्चों में हार्ट डैमेज, स्ट्रोक, न्यूरोलॉजिकल समस्याएं, फेफडे डैमेज या फेफडो मे काट, क्रोनिक फेटीग सिंड्रोम और जैसी घातक स्वास्थ्य समस्या देखी जा रही हैं.

दरअसल अमेरिका के नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन और सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के वैज्ञानिकों ने कोरोना के बाद का विश्लेषण किया, जिसमें उन्होंने पाया कि संक्रमण से ठीक होने वाले कई मरीजों में दूसरे जानलेवा लक्षण पैदा हो रहे हैं.

दुनिया भर में कोरोनावायरस अब भी काफी तेजी फैल रहा है. हालांकि, इसकी वैक्सीन के लिए खोज जारी, लेकिन अब अब एक और स्वास्थ्य संकट हम सब के सामने मुंह बाए खड़ा है, जिसे पोस्ट-कोविद सिंड्रोम कहा जा रहा है.

 

 

 

 

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