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भारत में कोरोना के बढ़ते मामलो को देख WHO ने जताई चिंता, कहा अब तो…करना पड़ेगा…

सरकार के मुताबिक, भारत में कोरोना के लगभग 92 फीसदी माइल्ड केस हैं। इनमें से केवल 5.8 फीसदी मामलों में ऑक्सीजन थेरेपी की जरूरत हुई। जबकि केवल 1.7 फीसदी मामलों में ही ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी।

 

स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने बताया कि, “भारत प्रति 10 लाख आबादी पर कोरोना केस और मृत्युदर को काबू करने में कामयाब रहा है। हमारे यहां प्रति 10 लाख आबादी पर 3328 मामले रिपोर्ट हुए और 55 लोगों की मौत हुई, जो कि कोरोना से प्रभावित हमारे जैसे अन्य देशों की तुलना में काफी कम है।”

सरकार का कहना है कि जनता कर्फ्यू और लॉकडाउन होने की वजह से देश को काफी फायदा हुआ है। लॉकडाउन लगाने से 14-29 लाख लोग कोरोना से बचाए गए। अगर लॉकडाउन समय पर न होता तो 37 से 78 हजार मौत और होती।

आपको बता दें कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने मानसूत्र सत्र के पहले ही दिन सदन में इन आंकड़ों को बताया था। उन्होंने बताया कि 11 सितंबर तक भारत में कोरोना के कुल केस 45 लाख 62 हजार थे और 76 हजार 271 लोगों की मौत हुई थी।

तब देश में कोरोना से मृत्युदर 1.67 फीसदी थी, जबकि दुनिया में मृत्युदर 3.2 फीसदी थी।उस समय तक देश में 35 लाख 42 हजार लोग कोरोना से ठीक भी हो गए थे।

भारत में कोरोना मामलों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। ऐसे में WHO ने भारत में बढ़ते कोरोना संक्रमण को लेकर बड़ी चिंता जाहिर की है। WHO का कहना है कि दुनिया में एक दिन में आने वाले मामलों में से 40 फीसदी भारत से आ रहे हैं।

वहां मरने वालो का आंकड़ा भी एक दिन में दुनियाभर में मरने वालों का 26 फीसदी भारत में है। फिर भी सरकार संसद में कह रही है कि भारत में कोरोना से ठीक होने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ रही है।

 

 

 

 

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