Wednesday , September 23 2020 19:02
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जापान ने बढ़ाई चीन की टेंशन, करने जा रहा भारत के साथ मिलकर…

युद्ध की स्थिति में ये सेवाएं बेहद अहम मानी जाती हैं। मोदी और आबे दोनों ने उम्मीद जताई कि यह डील दोनों देशों के रक्षा सहयोग को और गहराई देगा। हिंद महासागर क्षेत्र में शांति और सुरक्षा में मदद करेगा। जापान के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि यह समझौता दोनों देशों की सेनाओं के बीच घनिष्ठ सहयोग को बढ़ावा देगा।

इस डील के बाद भारत हिंद महासागर में भी रणनीतिक बढ़त सकता है। समझौते के बाद भारतीय सेनाओं को जापानी सेनाएं अपने अड्डों पर जरूरी सामग्री की आपूर्ति कर सकेंगी। साथ ही भारतीय सेनाओं के रक्षा साजो सामान की सर्विसिंग भी देंगी। यह सुविधा भारतीय सैन्य अड्डों पर जापानी सेनाओं को भी मिलेंगी।

भारत और जापान ने ऐसा समझौता किया है जिसकी वजह से चीन को हुआ टेंशन। क्योंकि इस समझौते के बाद चीन कोई भी हरकत करने से पहले कई बार सोचेगा। भारत और जापान की यह डील सैन्य बलों की आपूर्ति और सेवाओं के आदान-प्रदान को लेकर है। यानी युद्ध की स्थिति में भारत और जापान एक दूसरे को सैन्य सहायता मुहैया कराएंगे।

मोदी और आबे दोनों ने रक्षा सौदे के लिए एकदूसरे का आभार जताया. ऐसा समझौता पहली बार हुआ है जब जापान के साथ सशस्त्र बलों को परस्पर सेवाएं मुहैया कराई जाएंगी. भारत और जापान के बीच रणनीतिक संबंध पहले से हैं, लेकिन चीन से मौजूदा टकराव के बीच हुई इस डील से हिंद महासागर में चीन की घेराबंदी को तोड़ा जा सकता है। या रोका जा सकता है।

इससे पहले भी भारत ने अमेरिका, फ्रांस, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया से ऐसी डील कर चुका है। भारत के रक्षा सचिव अजय कुमार और जापान के राजदूत सुजूकी सतोशी ने म्यूचुअल लॉजिस्टिक सपोर्ट अरेंजमेंट (एमएलएसए) इस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

इससे पहले साल 2016 में भारत और अमेरिका ने जो डील की है, उसका नाम है- द लॉजिस्टिक एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (एलईएमओए). इस डील के तहत भारत को अमेरिकी सैन्य बेस जिबौती, डिएगो गार्सिया, गुआम और सुबिक बे में ईंधन और आवाजाही की अनुमति है।

सीमा विवाद को लेकर एलएसी पर चल रहे टकराव के बीच भारत ने हिंद महासागर में भी चीन की घेराबंदी तेज कर दी है। भारत और जापान के बीच हुए ऐतिहासिक रक्षा समझौते को बेहद अहम माना जा रहा है। समझौते के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे से फोन पर बात भी की।

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