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इस देश में घुसे चीन के लड़ाकू विमान, बिगड़े हालत , कही छोड़ न दे…

चीन पिछले कुछ अर्से से ताइवान को एक स्वायतशासी क्षेत्र के रूप में एकीकृत चीन का एक हिस्सा मानता आया है। उसे इस बात पर आपत्ति है कि अमेरिका उसे लड़ाकू विमान और शस्त्रों की आपूर्ति कर उसके अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप कर रहा है।

 

इस देश में घुसे चीन के लड़ाकू विमान, बिगड़े हालत , कही छोड़ न दे...

अमेरिका ने ताइवान के साथ पिछले वर्ष आठ अरब डालर के 66 एफ -16 लड़ाकू विमानों की आपूर्ति किए जाने के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

यही नहीं, ट्रम्प प्रशासन ताइवान को अस्त्र-शस्त्रों की अन्य खेपों में ड्रोन, आर्टीलरी बैटरीज, सी माइंस तथा मिसाइलें भी बेचने की तैयारी कर रहा है। ताइवान को बेचे जाने वाले हथियारों में आसमान से ज़मीन पर मार करने वाली मिसाइलें हैं।

इन मिसाइलों का उपयोग एफ-१६ लाड़ाकू विमानों के साथ किया जा सकता है, जो ताइवान को पहले ही दिए जा चुके हैं। ताइवान को हथियारों की इस आपूर्ति को लेकर चीन क्रुद्ध है।

जानकारों का मत है कि चीनी लड़ाकू विमान दो-दो में पहले भी ताइवानी जलडमरूमध्य पर उड़ान भरते हुए सीमा का अतिक्रमण करते रहे हैं। लेकिन चीन के 18 लड़ाकू विमानों ने एकसाथ हवाई ड्रिल कर आग में घी डालने का काम किया है।

स्थानीय मीडिया के अनुसार इस युद्धाभ्यास में चीन के दो एच-6 सामरिक बमवर्षक, आठ जे-16, चार जे-10 विमान थे, जो अलग-अलग दिशाओं से चीन और ताइवान के बीच जलडमरूमध्य की बीच की रेखा को पार कर ताइवान की दक्षिणी-पश्चमी सीमा में घुस आए थे।

बीजिंग और ताइपे के बीच रिश्तों में शुक्रवार को उस समय एक ख़तरनाक मोड़ आ गया जब चीनी वायु सेना के 18 लड़ाकू जेट और बमवर्षक विमानों ने हवाई ड्रिल में ताइवान के जलडमरूमध्य को घेरने का संकेत दिया। इस क़दम से चीन ने ताइवान के साथ-साथ अमेरिका को भी अहसास दिलाने की कोशिश की है कि वह ‘आग’ के साथ न खेले।

 

 

 

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