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HC ने तलाक अध्यादेश के खिलाफ याचिका को किया खारिज

आपको बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट में शाहिद आजाद नामक शख्‍स ने याचिका दायर की है। दायर चुनौती याचिका में कहा गया था कि तीन तलाक को लेकर मोदी सरकार के द्वारा लाया गया अध्यादेश कानूनी रूप से अनावश्यक और मुस्लिम महिलाओं पर थोपा गया है।

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तीन तलाक अध्यादेश को लेकर याचिका में कहा गया था कि यह सीधे तौर पर कानून का दुरुपयोग है। इसके अलावा यह आर्टिकल 14, 15, 20,21 और 25 का भी सीधे तौर पर उल्लंघन है। शाहिद आजाद ने अध्यादेश को याचिका में क्रिमिनल और सिविल लॉ स्कीम का उल्लंघन बताया गया। इसके साथ ही कहा गया है कि ये अध्यादेश अस्पष्ट और अनिश्चित है। याचिकाकर्ता शाहिद का कहना है कि ट्रिपल तलाक के अध्यादेश कानूनी रूप से पूरी तरह अनावश्यक हैं।

आपको बता दें कि राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने तीन तलाक के अध्यादेश पर हस्ताक्षर किए हैं। केंद्रीय कैबिनेट ने 19 सितंबर को बड़ा फैसला लेते हुए तीन तलाक अध्यादेश को मंजूरी दे दी थी। अध्यादेश में तीन तलाक को गैर जमानती अपराध माना गया है। राज्यसभा में तीन तलाक विधेयक पास नहीं होने के बाद केंद्र सरकार को अध्यादेश का रास्ता अपनाना पड़ा। हालांकि, सरकार के पास अब 6 महीने का समय है। इन छह महीनों में इसे संसद से पारित कराना होगा।

वहीं सुप्रीम कोर्ट ने 22 अगस्त 2017 को एक बार में तीन तलाक को गैरकानूनी और असंवैधानिक करार दिया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले इस साल एक बार में तीन तलाक के 177 मामले सामने आए थे और फैसले के बाद 66 मामले सामने आए। ये भी बतातें चले कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्‍त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से दिए भाषण में तीन तलाक का जिक्र किया था। मोदी ने कहा था कि तीन तलाक प्रथा मुस्लिम महिलाओं के साथ अन्याय है। तीन तलाक ने कई महिलाओं का जीवन बर्बाद कर दिया है।

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