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उत्पादन लक्ष्य के अनुरूप नहीं करने को लेकर 3 अरब डॉलर का जुर्माना लगाया

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पेट्रोलियम मंत्रालय को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. शीर्ष न्यायालय ने एक आदेश के विरूद्ध दायर मंत्रालय की याचिका खारिज कर दी है. आदेश में उन दस्तावेजों का खुलासा करने को बोला गया था जिसके आधार पर रिलायंस इंडस्ट्रीज के ऊपर केजी-डी6 से प्राकृतिक गैस उत्पादन लक्ष्य के अनुरूप नहीं करने को लेकर 3 अरब डॉलर का जुर्माना लगाया गया था.

लक्ष्य के अनुरूप प्राकृतिक गैस का उत्पादन नहीं करने को लेकर सरकार के जुर्माने के विरूद्ध अंतर्राष्ट्रीय पंचाट की तीन सदस्यीय पीठ ने रिलायंस  उसके भागीदार की याचिका पर मंत्रालय से उन दस्तावेजों को साझा करने को बोला था जिसके आधार पर कंपनी पर जुर्माना लगाया गया था. पेट्रोलियम मंत्रालय ने दस्तावेज के खुलासे संबंधी आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. न्यायालय ने 18 दिसंबर 2018 को याचिका खारिज कर दी. उसके बाद उसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गयी. शीर्ष न्यायालय ने पांच अगस्त 2019 को याचिका खारिज करते हुए बोला कि पूर्व के आदेश में हस्तक्षेप में उसकी रूचि नहीं है.

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सरकार ने 2012  2016 के बीच रिलायंस  उसके भागीदारों को केजी-डी6 से उत्पादन लक्ष्य से पीछे रहने को लेकर 3.02 अरब डॉलर की लागत की वसूली पर रोक लगा दी. जुर्माना निश्चित लागतों की वसूली की अनुमति नहीं देने के रूप में था. पेट्रोलियम मंत्रालय  उसकी तकनीकी इकाई हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय (डीजीएच) का मानना है कि उत्पादन का लक्ष्य के अनुरूप नहीं रहने का कारण कंपनी का केजी-डी6 ब्लाक में उतनी संख्या में कुओं की खुदाई नहीं करना है जिसकी उसने प्रतिबद्धता जतायी थी.

सूत्रों ने बोला कि साल 2015 में गठित तीन सदस्यीय मध्यस्थता पीठ (अंतरराष्ट्रीय पंचाट) ने रिलायंस  उसके भागीदार बीपी की याचिका पर सुनवाई की. याचिका में लागत वसूली की अनुमति देने से मना के पेट्रोलियम मंत्रालय के आदेश को चुनौती दी गयी थी. पीठ ने पेट्रोलियम मंत्रालय से उन सभी दस्तावेजों को साझा करने को बोला था जिसके आधार पर सरकार ने लागत वसूली की अनुमति नहीं देने का फैसला किया था.

रिलायंस  बीपी का मानना है कि केजी-डी ब्लाक के लिये उत्पादन साझेदारी अनुबंध (पीएससी) के तहत ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिसमें उत्पादन लक्ष्य के अनुरूप नहीं रहने पर लागत वसूली पर रोक की बात कही गयी हो. कंपनी को यह ब्लाक नेल्प के तहत आबंटित गया गया था. नेल्प के तहत अनुबंधकर्ताओं को सरकार के साथ फायदा साझा करने से पहले अपनी सभी प्रकार की लागत वसूलने की अनुमति दी गयी है. सरकार ने 2016 में लागत वसूली पर रोक के बाद फायदा में साझेदारी के तहत 1.75 करोड़ डॉलर का भी दावा किया.रिलायंस-बीपी का बोलना है कि केजी-डी6 ब्लॉक में उत्पादन में कमी का कारण कुओं में बालू  पानी आने के साथ अन्य अप्रत्याशित चीजों का होना है.

पेट्रोलियम मंत्रालय गोपनीयता से जुड़े उपबंधों का हवाला देकर दस्तावेज साझा करने का विरोध कर रहा है. बंगाल की खाड़ी में स्थित केजी-डी6 ब्लाक में धीरूभाई-1 से गैस उत्पादन 8 करोड़ घन मीटर रोजाना होना था लेकिन असली उत्पादन 2011-12 में केवल 3.53 करोड़ घन मीटर, 2012-13 में 2.088 करोड़ घन मीटर तथा 2013-14 में 97.7 लाख घन मीटर रहा. इसी दौरान 3 अरब डॉलर का जुर्माना लगाया गया था. बाद के सालों में उत्पादन में लगातार कमी आती गयी. वैसे यह 20 लाख घन मीटर रोजाना से नीचे है.

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