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कैलाश मानसरोवर की यात्रा में इस साल 18 दलों के कुल 949 यात्री हुए थे शामिल

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कैलाश मानसरोवर की यात्रा में इस साल 18 दलों के कुल 949 यात्री शामिल थे। इनमें से पारिवारिक और अन्य कारणों से 23 यात्रियों ने यात्रा बीच में ही छोड़ दी, जबकि एक यात्री की गुंजी में हार्ट अटैक से मौत हो गई। इस तरह कुल 925 यात्रियों ने भगवान भोलेनाथ की नगरी कैलाश के दर्शन किए। पिछले वर्ष 905 यात्रियों ने कैलाश की यात्रा की। वहीं इस वर्ष 209 यात्रियों ने आदि कैलाश के दर्शन किए।

कैलाश मानसरोवर यात्रा के अंतिम 18वें दल के 33 यात्री परिक्रमा पूरी कर शनिवार को चीन के तकलाकोट से गुंजी आ गए हैं। पिथौरागढ़ पर्यटक आवास गृह के प्रबंधक दिनेश गुरुरानी ने बताया कि इस वर्ष 18 दलों में कुल 949 यात्री शामिल रहे। इनमें 747 पुरुष और 202 महिलाएं हैं। 23 यात्रियों ने बीच में ही यात्रा छोड़ दी। एक यात्री की गुंजी में मौत हो गई। इस बार मानसरोवर यात्रा के दौरान अधिकांश समय मौसम ठीक रहा। इसके चलते यात्रियों को कैलाश के अच्छे तरीके से दर्शन हुए।

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चीन में सुरक्षा एजेंसियों के व्यवहार से गदगद हुए यात्री हालांकि 17वें दल के यात्रियों को कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ा। धारचूला से ऊपर गर्बाधार, पांगला में बारिश के चलते रास्ते टूटने और सड़क पर बोल्डर गिरने से यात्रियों को मालपा, लमारी में रोका गया।

बाद में यात्रियों को धारचूला वापस बुलाया गया। इसके चलते इस दल के 56 में से 16 यात्रियों ने यात्रा बीच में छोड़ दी। मौसम खुलने पर बाद में 40 यात्रियों ने यात्रा पूरी कर कैलाश के दर्शन किए।

चीन में सुरक्षा एजेंसियों और वहां के लोगों के व्यवहार से भी यात्री काफी गदगद रहे। वहीं इस वर्ष 12 दलों में 162 पुरुष और 47 महिलाओं कुल 209 यात्रियों ने आदि कैलाश की यात्रा की।

18वें दल के यात्रियों ने तकलाकोट में गाया राष्ट्रगान कैलाश मानसरोवर यात्रा के 17वें दल के यात्री यात्रा पूरी कर जागेश्वर रवाना हो गए हैं। यात्रा के अंतिम 18वें दल के यात्री परिक्रमा पूरी कर तकलाकोट से गुंजी पहुंच गए हैं। यात्रियों ने चीन के तकलाकोट में राष्ट्रगान भी गाया।

शनिवार को संपर्क अधिकारी बीएस बाजवा और पीएस मीणा के नेतृत्व में पर्यटक आवास गृह पहुंचे। प्रबंधक दिनेश गुरुरानी के नेतृत्व में निगम कर्मियों ने यात्रियों का स्वागत किया। यात्रियों ने मां उल्का देवी परिसर स्थित शहीद स्मारक पर एक दीया शहीदों के नाम जलाया।

बाद में उन्होंने गुरुरानी की पहल पर मानसरोवर वाटिका में एक पौधा शहीदों के नाम पर लगाया। पर्यटक आवास गृह में हरियाली और पर्यावरण संरक्षण के लिए किए गए कार्यों को देख यात्री काफी खुश नजर आए।

शनिवार को चीनी सुरक्षा एजेंसियों ने सुबह आठ बजे लिपुपास में यात्रियों को आईटीबीपी के सुपुर्द किया। यात्री आईटीबीपी के मेडिकल टीम के इंचार्ज डॉ. सौरभ चक्रवती के नेतृत्व में कमांडो दस्ता और संचार टीम के साथ गुंजी को लौट आए हैं।

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