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मेनोपॉज के बाद बढ़ते वजन पर ऐसे लगाए लगाम, ट्राई करे यह उपाय

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महिलाओं को निश्चित आयु के बाद एक जरूरी शारिरिक परिवर्तन के दौर से गुजरना होता है. यदि आपकी आयु 40 या 50 वर्ष के पार है  शरीर में आकस्मित गर्मी बढ़ती है, सोते समय पसीना आता है तो समझिए मेनोपॉज यानी रजोनिवृत्ति का वक्त आ गया.  इसका लाभ यह होगा कि पीरियड्स आने बंद हो जाएंगे, पीरियड के दर्द से मुक्ति मिलेगी, लेकिन एक बड़ा नुकसान यह है कि पेट के आसपास चर्बी जमना प्रारम्भ हो जाएगी. यानी यह तय करना कठिन है कि मेनोपॉज की खुशी मनाएं या अफसोस. बहरहाल, मेनोपॉज के बाद बढ़े वजन को कम करने के कुछ सरल टिप्स हैं. जानिए इसी बारे में –

एक आयु के बाद, अंडाशय (Ovaries) में एस्ट्रोजेन  लैक्टोजेन बनना बंद हो जाते हैं, यानी अंडे का उत्पादन बंद हो जाता है. इसके बाद महिला मां नहीं बन सकती है. इतना पढ़कर आपको लग रहा है कि मेनोपॉज अच्छी बात है, क्योंकि अब पीरियड्स बंद हो जाएंगे.

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मेनोपॉज के नुकसान-
मेनोपॉज के कारण स्त्रियों के शरीर में एस्ट्रजन हार्मोन का बनना कम हो जाता है. यह सबसे बड़ा नुकसान होता है, क्योंकि एस्ट्रजन हार्मोन हार्ट की रक्षा करता है. इसके बाद कुछ अन्य महत्वपूर्ण हार्मोन भी कम होने लगते हैं जैसे एस्ट्रडाइओल. यह हार्मोन मैटाबॉलिज्म को नियंत्रित करता है. स्ट्रडाइओल हार्मोन की मात्रा घटना यानी वजन बढ़ना. खासतौर पर पेट के आसपास जमने वाली चर्बी हानिकारक होती है.

जाहिर तौर पर मेनोपॉज के बाद वजन बढ़ने का एक मात्र कारण एस्ट्रडाइओल हार्मोन की कमी नहीं है. बढ़ती आयु  लाइफस्टाइफ भी इसमें अपनी किरदार निभाते हैं. 40 वर्ष की आयु के बाद महिला हो या पुरुष, कम एक्टिव हो जाते हैं. कैलोरी खर्च नहीं होती. व्यायाम नहीं होता. खान-पान का नियम नहीं रहता. नींद भी अनियमित हो जाती है, जिससे वजन बढ़ता है.

मेनोपॉज के बाद पेट में चर्बी जमने के अपने नुकसान हैं. सांस लेने में समस्या होती है. हार्ट से जुड़ी बीमारियों के साथ ही डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है. कई रिसर्च में खुलासा हुआ है कि मोटा पेट ब्रेस्ट, कोलन या एंडोमेट्रियल कैंसर का कारण भी बनता है.

मेनोपॉज के बाद वजन कम करने के उपाय-
एक्टिव लाइफस्टाइल का कोई तोड़ नहीं है. प्रातः काल उठते ही एक्टिव हो जाएं. यदि पहले कभी वर्कआउट नहीं किया है तो अब प्रारम्भ कर दें. सप्ताह में कम से कम 75 मिनट जॉगिंग करें. वॉकिंग भी अच्छा विचार है. सप्ताह में कम से कम पांच या छह दिन  35 मिनट वॉकिंग करें. गति 6 किमी प्रति घंटा से तेज होनी  चाहिए.

उम्र के साथ मांसपेशियां निर्बल होती जाती हैं. स्ट्रैंथ बढ़ने वाली ट्रैनिं  वजन उठाने की ट्रैनिंग से मांसपेशियां मजबूत होंगी. साथ ही कैलोरी भी ज्यादा खर्च होगी. एरोबिक्स अभ्यास भी चर्बी कम करने का अच्छा उपाय है.

खाने से पहले सोचें- 
शरीर के वजन के बढ़ने से रोकने के लिए अपनी जबान पर लगाम कसना होगी. यानी केवल स्वाद के लिए खाना बंद करना होगा. खाने-पीने का मुद्दे में ज्यादा अनुशासित होने की आवश्यकता है. प्रयास करें कि ज्यादा कैलोरी वाली चीजें न खाएं. सब्जियों  अन्न का ज्यादा सेवन करें. फलियां, नट्स, सोया, मछली  कम वसा वाले डेयरी उत्पाद में कैलोरी कम होती है  प्रोटिन ज्यादा. इनसे मांसपेशियों की मजबूती में मदद मिलती है.

तनाव को अपने पास न फटकने दें-
आप जिंदगी के किसी भी दौर में हों, तनाव खतरनाक है. मेनोपॉज के बाद तनाव को दूर रखने=  भी महत्वपूर्ण हो जाता है. तनाव के कारण शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का लेवल बढ़ जाता है. इससे वजन बढ़ता है. योग  ध्यान, खुद को शांत  स्वास्थ्य वर्धक रखने के कारगार तरीका हैं.

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