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सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच की याचिका की खारिज, राजनेताओं के आरोपों से मचा हड़कंप

नई दिल्ली:  सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कर्नाटक राज्य में एक मंत्री और अन्य राजनेताओं से जुड़े कथित हनी-ट्रैप प्रयास की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। जस्टिस विक्रम नाथ, संजय करोल और संदीप मेहता की तीन सदस्यीय बेंच ने यह फैसला सुनाया। यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता बिनय कुमार सिंह ने दायर की थी, जिसमें जांच की निगरानी शीर्ष अदालत या फिर सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता वाली एक समिति से करने की मांग की गई थी।

मामले में याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील बरुण कुमार सिन्हा ने अदालत में कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स में जो आरोप लगाए गए हैं, उनके पीछे के लोगों के खिलाफ गहन जांच की आवश्यकता है। याचिका में यह भी कहा गया कि कुछ स्वार्थी तत्वों द्वारा न्यायाधीशों को हनी ट्रैप में फंसाना न्यायपालिका की स्वतंत्रता और कानून के शासन के लिए गंभीर खतरा है।

बता दें कि दायर याचिका में बताया गया कि इस मामले की शुरुआत 21 मार्च 2025 को मीडिया द्वारा रिपोर्ट किए गए आरोपों से हुई, जिसमें कर्नाटक विधानसभा में यह दावा किया गया था कि राज्य का मुख्यमंत्री बनने की चाहत रखने वाले एक व्यक्ति ने न्यायाधीश समेत कई लोगों को हनी-ट्रैप में फंसाने में सफल हुआ। याचिका में यह भी कहा गया कि एक मौजूदा मंत्री ने स्वयं को इस मामले का शिकार बताया, जिससे इन गंभीर आरोपों को विश्वसनीयता मिली।

बीते दिनों सहकारिता मंत्री ने किया था दावा
कर्नाटक के सहकारिता मंत्री के एन राजन्ना ने 20 मार्च को विधानसभा में कहा था कि उन्हें “हनी-ट्रैप” करने का प्रयास किया गया और यह कि कर्नाटक के 48 राजनेताओं को इसी तरह की योजनाओं का शिकार बनाया गया है। राजन्ना ने यह भी दावा किया था कि राज्य में सीडी और पेन ड्राइव फैक्ट्री चल रही है, जिसमें 48 लोगों के वीडियो और पेन ड्राइव उपलब्ध हैं। उनका यह भी कहना था कि यह नेटवर्क पूरे भारत में फैला हुआ है और कई केंद्रीय मंत्री भी इसके जाल में फंस चुके हैं।

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