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उत्तर प्रदेश में 896 हेड कांस्टेबल हुई पदावनति, जानिए हैरान कर देने वाली ये वजह

डीजीपी मुख्यालय की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि कांस्टेबल जितेन्द्र कुमार सिंह एवं तीन अन्य ने अपनी प्रोन्नति के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

 

इस पर हाईकोर्ट ने विभाग को याचिका कर्ताओं के प्रत्यावेदन पर छह हफ्ते में निर्णय लेने का आदेश दिया था। चारों याचिकाकर्ता पीएसी संवर्ग में भर्ती हुए थे और परिचालनिक कारणों से जनपदीय पुलिस में स्थानान्तरित हुए थे। हालांकि उनका काडर परिर्वतन नहीं हुआ था। प्रत्यावेदन पर विचार कर संस्तुति देने के लिए विभाग ने एक चार सदस्यीय कमेटी बनाई।

गौरतलब है कि डीआईजी कार्मिक एवं स्थापना डॉ. राकेश शंकर की तरफ से जारी एक आदेश के तहत नागरिक पुलिस में हेड कांस्टेबल पद पर कार्यरत 890 पुलिस कर्मियों को पदावनत करते हुए पीएसी में कांस्टेबल पद पर वापस भेजा गया है। सालों पहले पीएसी से नागरिक पुलिस में आए ये पुलिस कर्मी प्रोन्नत होकर हेड कांस्टेबल बने थे।

इसी तरह एडीजी स्थापना की तरफ से डीएसपी स्थापना सुधीर कुमार सिंह द्वारा जारी एक आदेश के तहत विभिन्न जिलों में सब इंस्पेक्टर पद पर कार्यरत 6 पुलिस कर्मियों को पदावनत कर पीएसी में कांस्टेबल के उनके मूल पद पर भेज दिया गया है।

डीएसपी स्थापना सुधीर कुमार सिंह की तरफ से ही जारी एक अन्य आदेश के तहत विभिन्न जिलों में कांस्टेबल पद पर तैनात 22 पुलिसकर्मियों को पीएसी में कांस्टेबल पद पर ही वापस भेज दिया गया है।

उत्तर प्रदेश में डीजीपी मुख्यालय ने 896 पुलिस कर्मियों को पदावनत करते हुए उनके मूल काडर पीएसी में वापस भेजने का फैसला किया है। इसके अलावा 22 कांस्टेबल को भी वापस भेजने का फैसला लिया गया है।

इन सभी को पीएसी मुख्यालय लखनऊ में भेजा गया है। इस आदेश के जारी होते ही विभाग में हड़कंप मच गया तो वहीं इस फैसले से प्रभावित कई पदावनत पुलिस कर्मी आदेश के विरुद्ध हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में हैं।

 

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