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राजस्थान में मतदान, सबसे कड़ा मुकाबला अजमेर में ‘बीजेपी को ढाई लाख जाट मतों का भरोसा’

राजस्थान में पहले चरण का मतदान आज हो रहा है. इसमें सबसे कड़ा मुकाबला अजमेर में हैं. यहां कांग्रेस पार्टी ने रिजू झुनुझुनवाला को तो बीजेपीने भागीरथ चौधरी को उतारा है. रिजू प्रदेश के सबसे धनी प्रत्याशी हैं. यह मुकाबला वैश्व बनाम जाट बन गया है. बीजेपी को जहां ढाई लाख जाट मतों का भरोसा है, वहीं रिजू वैश्य मतों के भरोसे हैं. कांग्रेस पार्टी की उम्मीद चार लाख दलित  ढाई लाख मुस्लिम वोट भी बढ़ाते हैं. हालांकि, दोनों प्रत्याशियों में से किसका अंकगणित सटीक निकलेगा, इसका जवाब तो 23 मई को मिलेगा.

बहरहाल, यहां कांग्रेस पार्टी के लिए मुकाबला सरल नहीं रहने वाला. रिजू को यहां डिप्टी मुख्यमंत्री सचिन पायलट का मजबूत समर्थन मिल रहा है. बता दें- सचिन 2009 में यहां से सांसद रह चुके हैं. लेकिन 2014 में वे सांवरलाल जाट से हारे थे. बीजेपी की प्रचार अभियान समिति के प्रमुख ओकार सिंह लखावत कहते हैं- हमने जाट उम्मीदवार भागीरथ चौधरी को 2019 की जंग के लिए रिजर्व में रखा हुआ था. आज जाट समुदाय हमारे साथ खड़ा है, इसी तरह सवा लाख रावत वोट भी हमारे साथ ही जाएंगे. अजमेर में पॉलिटिक्स विज्ञान के व्याख्याता दीपेंद्र सिंह राठौड़ कहते हैं- अजमेर में बीजेपी की जीत पक्की है. क्योंकि जाट उम्मीदवार के विरूद्ध वोटों का वैसा ध्रुवीकरण अभी तक नहीं हो पाया है, जैसा 2018 के उपचुनाव में हुआ था.हालांकि, अजमेर में विधानसभा का गणित कांग्रेस पार्टी के विरूद्ध जाता है. चार महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी यहां की आठ में से मात्र 2 सीटों पर ही जीत पंजीकृतकर पाई थी.

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टोंक-सवाई माधोपुर सीट की बात करें, तो यहां कांग्रेस पार्टी के नमोनारायण मीणा मजबूत दिखते हैं. बीजेपी के सुखबीर सिंह जौनपुरिया राष्ट्रवाद  मोदी फैक्टर के भरोसे हैं. यहां दलित, मीणा  मुस्लिम मतदाताओं का गठजोड़ कांग्रेस पार्टी के पक्ष में दिख रहा है. यहां की आठ विधानसभा सीटों में से छह पर कांग्रेस पार्टी के विधायक हैं. बीजेपी को सिर्फ एक मालपुरा सीट मिली थी. यही वजह है कि टोंक, गंगापुर सिटी, निवाई, देवली, बामनवास  सवाई माधोपुर जैसे इलाकों में कांग्रेस पार्टी मजबूत दिखती है.

अब कोटा-बूंदी सीट पर आते हैं. यहां वोटों का समीकरण ही कुछ ऐसा है कि जो बूथ मैनेज कर पाएगा, जीत उसी को मिलेगी. कोटा में कांग्रेस पार्टी ने रामनारायण मीणा को उतारा है, वहीं बीजेपी ने फिर से सांसद ओम बिरला पर दांव लगाया है. रामनारायण मीणा की प्रयास है कि चुनाव को राष्ट्रीय मुद्दों से इतर लोकल मुद्दों पर लाया जाए. कोटा बीजेपी की परंपरागत सीटों में से एक है. 2009 में यहां कांग्रेस पार्टी से जीते इज्यराज सिंह भी बीजेपी में ही आ चुके हैं. यहां गणित बीजेपी के पक्ष का है. विधानसभा चुनाव में एंटी इन्कम्बेंसी के बावजूद बीजेपीने यहां की आठ में से पांच सीटें जीती थीं.  फिर यह चुनाव तो देश का है. ऐसे में बीजेपी का ग्राउंड कनेक्ट ज्यादा दिखता है.

कोटा-बूंदी की ही तरह बीजेपी झालावाड़-बारां में निश्चिंत दिखती है. 1989 में बीजेपी ने वसुंधरा राजे के दम पर यह सीट कांग्रेस पार्टी के हाथ से निकाली थी. तब से आज तक यह वसुंधरा परिवार की ही सीट है. खुद वसुंधरा यहां पांच बार चुनाव जीत चुकी हैं. पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के पुत्र दुष्यंत यहां फिर मैदान में हैं. कांग्रेस पार्टी ने यहां प्रमोद शर्मा को टिकट दिया है.दुष्यंत यहां चार महीने की अशोक गहलोत सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाकर मैदान में हैं. वे यहां विकास को अपनी जीत का आधार मानते हैं. यहां गांव-गांव में पक्की सड़कें तो दिखती हैं, लेकिन पीने का पानी बड़ी समस्याओं में से एक है.

उदयपुर संभाग की चार सीटों पर भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) मुकाबले में है. बांसवाड़ा  उदयपुर में यह मुकाबले को त्रिकोणीय बना रही है. बता दें- बीटीपी ने मेवाड़ की 11 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था  दो सीटों पर जीत पंजीकृत की थी. उदयपुर में बीजेपी के अर्जुन मीणा  कांग्रेस पार्टी के रघुवर मीणा मुकाबले में हैं. कांग्रेस पार्टी को मुस्लिम वोट की उम्मीद है. यहां विधानसभा चुनाव की बात करें तो इस संसदीय क्षेत्र की आठ में से सात विधानसभा सीटों पर बीजेपी जीती थी. सिर्फ एक सीट कांग्रेस पार्टी को मिल पाई थी. एंटी इन्कम्बेंसी के बावजूद बीजेपी की जीत का लाभ इस चुनाव में भी मिल सकता है.

बांसवाड़ा में बीटीपी का मुस्लिम मतदाताओं से गठजोड़ होता दिख रहा है. बीटीपी के कांतिलाल रौत आदिवासियों के वोट पर दांव खेल रहे हैं जो यहां 76% हैं. बीजेपी ने कनकमल कटारा को टिकट दिया है. कांग्रेस पार्टी ने ताराचंद भगोरा को मैदान में उतारा है जो 2009 में विजयी रहे थे. बांसवाड़ा की आठ विधानसभा सीटों में से तीन पर कांग्रेस पार्टी है, दो पर भाजपा, दो पर बीटीपी  एक पर निर्दलीय है. ऐसे में कांग्रेस पार्टी यहां थोड़ी शक्तिशाली दिखती है. हालांकि बीटीपी उलटफेर कर सकती है.

चित्तौड़गढ़ में बीजेपी के चंद्र प्रकाश जोशी का मुकाबला कांग्रेस पार्टी के गोपाल सिंह से है. जोशी ने 2014 में कांग्रेस पार्टी की गिरिजा व्यास को तीन लाख से अधिक वोटों से हराया था.चित्तौड़गढ़ में विधानसभा के नजरिए से दोनों की ताकत देखें तो दोनों दल बराबरी पर दिखते हैं. आठ सीटों में से बीजेपी  कांग्रेस पार्टी दोनों के पास चार-चार सीटें हैं. लेकिन पुराने रिकॉर्ड को देखते हुए बीजेपी एक कदम आगे दिखती है.

सबसे असरदार क्या रहेगा?

  • मुद्दे: कर्जमाफी, मोदी फैक्टर: राजस्थान में मोदी की लोकप्रियता दिखती है. विधानसभा चुनाव में तो नारे लगे थे- मोदी तुझसे बैर नहीं, वसुंधरा तेरी खैर नहीं. कांग्रेस पार्टीकर्जमाफी  न्याय योजना के भरोसे है. हालांकि, किसान कर्जमाफी को बीजेपी यहां कांग्रेस पार्टी के धोखे के रूप में पेश कर रही है.
  • जातीय गणित: राजस्थान में जातीय गणित जीत-हार की सबसे अहम इकाई है. दोनों ही दलों ने इसी आधार पर टिकट बांटे हैं. हालांकि, बीजेपी डॉ किरोड़ी मीणा  हाल ही बीजेपी में शामिल हुए कर्नल किरोड़ी बैंसला का कितना लाभ ले पाएगी, यह देखना होगा.

 

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