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39 वर्ष की महिला ने दिया 38 बच्चों को जन्म, इसमें से 6 जोड़े जुड़वा

मरियम नबातांजी जब12 वर्ष की थीं, तब उनका शादी हुआ. एक वर्ष बाद उन्होंने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया. इसी दौरान वह चिकित्सक के पास गईं. तब पता चला कि उनका अंडाशय असामान्य रूप से बड़ा है  गर्भ निरोधक गोलियां स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकती हैं. तब नबातांजी को नहीं पता था कि शरीर की यह विकृति उसे 38 बच्चों की मां बनने पर विवश कर देगी. 39 वर्ष की महिला सारे बच्चों की परवरिश खुद कर रही है, क्योंकि दो वर्ष पहले पति ने भी उससे किनारा कर लिया.

  1. 39 वर्ष की महिला के 38 बच्चे हैं. इसमें से 6 जोड़े जुड़वा हैं. चार बार उसके तीन-तीन बच्चे हुए, जबकि पांच बार उसने चार-चार बच्चों को जन्म दिया. एक बार ऐसा मौका भी आया, जब महिला ने छह बच्चों को एक साथ जन्म दिया. हालांकि, उनमें से कोई भी जिंदा नहीं बचा. नबातांजी अपने बच्चों के साथ कंपाला से 51 किमी उत्तर में स्थित गांव में रहती है. उसका परिवार अफ्रीका में सबसे बड़ा है.
  2. आखिरी बार नबातांजी ढाई वर्ष पहले गर्भवती हुई थीं. तब उनके पेट में छह बच्चे थे. एक ने पेट में ही दम तोड़ दिया, जिसकी वजह से उनमें से कोई भी जीवित नहीं रह सका.उनका पति अक्सर घर से गायब रहता था. नबातांजी के घर में पति का नाम एक अभिशाप की तरह से लिया जाता है.
  3. महिला का बोलना है कि ज़िंदगी में उसे बहुत सारे दुख झेलने पड़े. पति ने बहुत ज्यादा परेशान किया. उनका बोलना है कि अब परिवार की देखभाल ही उनकी दिनचर्या है. पैसा कमाने के साथ उन्हें खुद ही सारे बच्चों की देखभाल करनी होती है. पैसा कमाने के लिए उन्हें हेयरड्रेसिंग से लेकर कबाड़ बेचने तक का कार्य करना पड़ा रहा है.
  4. नबातांजी का बोलना है कि ज्यादा बच्चे होने के लिए उसका बीता समय जिम्मेदार है. उनके जन्म के तीन दिनों के बाद मां छोड़कर चली गई. पिता ने फिर से विवाह की. सौतेली मां ने सभी बच्चों के खाने में कांच का गिलास तोड़कर मिला दिया. उसके भाई-बहन मारे गए  वह किसी तरह से अपनी जान बचा सकी. तब वह सात वर्ष की थी.
  5. उसने एक सम्बन्धी के घर पर शरण ली. तब उसके मन में ख्याल था कि वह छह बच्चों को जन्म देकर फिर से परिवार को बनाएगी. लेकिन बड़े परिवार को संभालना हंसी खेल नहीं है. नबातांजी का बोलना है कि अब एक ही ख्वाब है कि बच्चे जल्दी अपने पैरों पर खड़े हो जाएं. उन्हें उन दुश्वारियों का सामना न करना पड़े, जिनसे लड़ने में उनका सारा ज़िंदगी बीत गया.
  6. नबातांजी की सबसे बड़ी संतान 23 वर्ष की है. उनके बेटे किबुका का बोलना है कि वह अपनी मां की हरसंभव मदद करते हैं, लेकिन सारे परिवार का बोझ उन्होंने अपने कंधों पर उठा रखा है. किबुका सेकेंडरी स्कूल से आगे पढ़ाई नहीं कर सका, क्योंकि घर में पैसों का अभाव था.
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