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अब यूपी की चाबी पूर्वांचल के पास, अपना दल जीतने में पास रही सहयोगी पार्टी

यूपी हमेशा से दिल्ली की सल्तनत के लिए रास्ता तैयार करता है व यूपी की चाबी पूर्वांचल के पास है। इस लोकसभा चुनाव 2019 ) में पूर्वांचल में पीएम मोदी, अखिलेश यादव, प्रियंका गांधी, योगी आदित्यनाथ, मनोज सिन्हा, डॉ महेन्द्रनाथ पांडेय व फ़िल्म स्टार रविकिशन एवं निरहुवा की भी भाग्य दांव पर लगी है।

पीएम मोदी पूर्वांचल में खिला सकेंगे कमल
पूर्वांचल में एक पुरानी कहावत है कि यहां कब किसके समर्थन में पुरवइया बह जाए ये कोई नहीं कह सकता। इस बार पूर्वांचल में वाराणसी सीट से भाजपा प्रत्याशी पीएम नरेंद्र मोदी की साख सबसे ज्यादा दांव पर लगी है। पूर्वांचल में लोकसभा की 26 सीटें है व पिछली बार 26 में से 24 सीटें भाजपा व उसकी सहयोगी पार्टी अपना दल जीतने में पास रही। इस बार माहौल व स्थितियां बदल चुकी हैं।

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बात सबसे पहले वाराणसी सीट पर करते हैं। यहां पर पीएम मोदी के सामने अभी कोई नहीं दिख रहा है। कांग्रेस पार्टी व साझेदारी ने अभी तक अपने प्रत्याशी भी घोषित नही किए हैं। लेकिन मोदी के सामने वाराणसी सीट पर ही विजय नहीं बल्कि पूरे पूर्वांचल में भाजपा प्रत्यशियों को जिताने की चुनौती है।

वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ भट्टाचार्य कहते है कि मोदी लहर 2014 जैसी नहीं है व सपा-बसपा के गठजोड़ से भाजपा की कई सीटें खतरे में आ गई हैं। अमिताभ भट्टाचार्य ने बोला कि जो सत्ता में होता है उससे उम्मीदें भी होती है व कितनी उम्मीदें पूरी हुई है ये 23 मई को मालूम चलेगा।

कांग्रेस महासचिव व पूर्वांचल प्रभारी प्रियंका गांधी पर टिकी निगाहें
अब कांग्रेस पार्टी की बात कर लेते हैं। 2019 में कांग्रेस पार्टी ने प्रियंका गांधी पर बड़ा दांव खेला है। प्रियंका गांधी को पूर्वांचल की जिम्मेदारी दी गई है, साथ ही पार्टी ने महासचिव भी नियुक्त किया है। भाई के हाथों को मजबूत करने के लिए प्रियंका गांधी ताबड़तोड़ रोड शो व रैलियां कर रही हैं।

2014 में पार्टी की सबसे बुरी स्थिति हुई। इस बार सबसे ज्यादा प्रतिष्ठा कांग्रेस पार्टी व प्रियंका गांधी की पूर्वांचल एरिया में लगी हुई है क्योंकि पिछले लोकसभा व विधानसभा चुनाव में पार्टी का जनाधार व वोट फीसदी सबसे कम रहा है। कांग्रेस पार्टी को भाजपा व साझेदारी से लड़ना है जो फिल्हाल बहुत ज्यादा कठिन दिख रहा है। हालांकि प्रियंका कार्यकर्ताओं में नयी जान फूंकने की प्रयास जरूर कर रही हैं।

राजनैतिक विश्लेषक तुलसीदास मिश्र ने बोला कि पूर्वांचल में अधिकांश सीटों पर भाजपा व सपा-बसपा साझेदारी के बीच मुकाबला है कुछ सीटों पर कांग्रेस पार्टी मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में जुटी है।

अखिलेश यादव के लिए चुनौतियां कम नहीं हैं
चुनौती सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को भी मिल रही हैं। अखिलेश यादव आजमगढ़ से चुनाव लड़ रहे हैं व उनके सामने भाजपा ने भोजपुरी स्टार दिनेश लाल यादव ऊर्फ निरहुआ को मैदान में उतारा है। अखिलेश यादव के सामने आजमगढ़ सीट पर विजय पताका फहराने की ही चुनौती नही हैं बल्कि पूर्वांचल की अन्य सीटों पर भी साझेदारी के प्रत्याशियों को जिताने की जिम्मेदारी है। उपचुनाव में सपा ने गोरखपुर सीट से जीत हासिल कर भाजपा व योगी आदित्यनाथ को पटकनी दी थी व सपा बीएसपी का गठजोड़ भी पास रहा था।

सीएम योगी की पूर्वांचल में अग्निपरीक्षा
मुख्यमंत्री योगी की भी प्रतिष्ठा दांव पर है। राजनैतिक विश्लेषकों की मानें तो 2 वर्ष के शासनकाल को भी जनता परखेगी। उपचुनाव में गोरखपुर सीट भी भाजपा को गंवानी पड़ी थी। सपा के प्रवीण निषाद ने गोरखपुर सीट पर विजय हासिल की थी। गोरखपुर का गढ़ भाजपा का अभेद दुर्ग रहा है व दुर्ग को सपा ने उपचुनाव में ध्वस्त कर दिया था। मुख्यमंत्री योगी की ये सीट कर्मभूमि रही है। इस सीट पर साझेदारी व भाजपा के बीच सीधा मुकाबला होगा।

बीजेपी अध्यक्ष महेन्द्रनाथ पांडेय का भविष्य तय करेगा पूर्वांचल
इस बार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्रनाथ पांडेय की मुश्किलें भी बढ़ सकती है। चंदौली लोकसभा सीट से इस बार सपा-बसपा साझेदारी ने उनके लिए खतरे की घंटी बजा दी है। 2014 में डॉ महेन्द्रनाथ पांडेय ने अनिल कुमार मौर्य को डेढ़ लाख वोटों से हराया था। हालांकि अभी तक साझेदारी ने अपने प्रत्याशी का ऐलान नहीं किया है लेकिन सपा-बसपा के आने से इस सीट पर मुकाबला दिलचस्प होता जा रहा है। डॉ महेन्द्रनाथ पांडेय ने बसपा के अनिल कुमार मौर्य को हराया जबकि सपा प्रत्याशी तीसरे जगह पर रहे। सपा-बसपा के वोटों को जोड़ दें तो महेन्द्रनाथ पांडेय को अपनी सीट बचानी कठिन होगी।

अपना दल का अस्तित्व भी मिर्जापुर की जीत-हार तय करेगा
मिर्जापुर सीट पर अपना दल की उम्मीदवार अनुप्रिया पटेल की प्रतिष्ठा दांव पर है। 2014 में अनुप्रिया पटेल ने बीएसपी के समुद्र बिंद को हराया था लेकिन इस बार सपा-बसपा साझेदारी व प्रियंका गांधी के कारण इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला होगा। कांग्रेस पार्टी ने एक बार फिर ललितेश त्रिपाठी, सपा से समुद्र बिंद व अपना दल की अनुप्रिया पटेल के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होगा।

गाजीपुर से मनोज सिन्हा की प्रतिष्ठा दांव पर रहेगी
गाजीपुर सीट से भाजपा ने दोबारा मनोज सिन्हा को मैदान में उतारा है तो साझेदारी अफजाल अंसारी व कांग्रेस पार्टी ने अजीत कुशवाहा को मैदान में उतारा है। राजनैतिक विश्लेषक मानते हैं कि चुनाव में राष्ट्रवाद की लहर चली तो भाजपा को बहुत ज्यादा सीटें मिलेंगी लेकिन अगर जातीय समीकरण चले तो साझेदारी कई बड़े चेहरों का खेल बिगाड़ सकते है। हालांकि भाजपा के कार्यकर्ता इस सीट पर जीत को लेकर आश्वस्त है

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