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‘भारत-स्थित कॉल सेंटर घोटाला उद्योग’ पर नजर रखे हुए है अमेरिकी सरकार

असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल ब्रायन बेनकोवस्की ने लाखों डॉलर के एक कॉल सेंटर घोटाला रैकेट में कथित रूप से संलिप्त एक भारतीय नागरिक को सिंगापुर से प्रत्यर्पित किए जाने की घोषणा करते हुए उन्होंने चेताया कि अमेरिकी सरकार ‘भारत-स्थित कॉल सेंटर घोटाला उद्योग’ पर नजर रखे हुए है।

न्याय विभाग ने शुक्रवार को कहा कि अहमदाबाद में एचग्लोबल कॉल सेंटर के संचालक हितेश मधुभाई पटेल को घोटाले से जुड़े आरोपों पर मुकदमे का सामना करने के लिए प्रत्यर्पित किया गया। इस घोटाले में कॉल सेंटर में काम कर रहे लोगों के जरिए अमेरिकी सरकार का अधिकारी बन हजारों अमेरिकियों से लाखों डॉलर की उगाही की गई।

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आईएएनएस द्वारा अदालत से प्राप्त दस्तावेज के अनुसार, पटेल को शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया था और ह्यूस्टन स्थित एक संघीय अदालत में पेश किया गया, जहां मजिस्ट्रेट न्यायाधीश पीटर ब्रे ने उन्हें हिरासत में भेज दिया। उन्हें बुधवार को दोबारा अदालत में पेश किया जाएगा।

बेनकोवस्की ने कहा, ‘यह प्रत्यर्पण एकबार फिर न्याय विभाग की भारत स्थित कॉल सेंटर घोटाला उद्योग को समाप्त करने और हमारे नागरिकों के साथ ठगी करने वाले गुनाहगारों को जिम्मेदार ठहराने के लिए विदेशी सहयोगियों के साथ काम करने की अटूट प्रतिबद्धता को दिखाता है।’

उन्होंने साथ ही कहा कि ‘पटेल एक कॉल सेंटर चलाता था, जो कथित रूप से एक बड़े घोटाले के तहत झांसे में आने वाले अमेरिकी नागरिकों को अपना शिकार बनाता था।’

न्याय विभाग ने कहा, ‘पटेल के भारत से सिंगापुर जाने के बाद, उसे 21 सितंबर, 2018 को वहां गिरफ्तार किया गया था। अमेरिका के आग्रह पर, सिंगापुर के कानून मंत्री के षणमुगम ने उसे अमेरिका को सुपुर्द करने के लिए 25 मार्च को उसके खिलाफ वारंट जारी किया था।’

डीएचएस ह्यूस्टन फील्ड ऑफिस के प्रभारी विशेष एजेंट डेविड ग्रीन ने कहा, ‘इस ऐतिहासिक प्रत्यर्पण को अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक संगठनों के लिए एक नोटिस के तहत देखा जाना चाहिए, जिसके अंतर्गत घरेलू सुरक्षा विभाग उनलोगों को गिरफ्तार करना चाहता है, जो हमारे नागरिकों को ठगकर खुद को धनी बनाते हैं।’

उन्होंने विदेशी कॉल सेंटरों के मालिकों, प्रबंधकों और कर्मचारियों के खिलाफ वैश्विक कार्रवाई की चेतावनी दी।

2016 में कथित घोटाले के लिए पटेल, 55 लोगों और पांच कंपनियों को आरोपी बनाया गया था। 55 लोगों में अधिकतर भारतीय मूल के थे।

उनके खिलाफ दर्ज आरोप-पत्र के अनुसार, भारत स्थित कॉल सेंटर कथित रूप से खुद को कर या आव्रजन अधिकारी बताकर अमेरिका में लोगों को फोन करते थे और उन्हें खुद के द्वारा बताए गए कर या जुर्माना नहीं चुकाने की स्थिति में गिरफ्तार करने की धमकी देते थे।

आरोप के अनुसार, जब पीड़ित पैसे देने के लिए तैयार हो जाता था तो कॉल सेंटर के लोग अमेरिका स्थित उनके सह-साजिशकर्ताओं के द्वारा स्टोर कार्ड्स या वायर ट्रांसफर्स के जरिए भुगतान का प्रबंध करते थे और ये लोग फर्जी पहचान से इन्हें कैश करा लेते थे।

दूसरे प्रयासों के तहत, वे लैंडिंग के लिए लोगों को फर्जी ऋण और संग्रहित राशि की पेशकश करते थे।

कोषागार महानिरीक्षक जे. रसेल जॉर्ज ने कहा, ‘2013 से, कर अधिकारी बताकर ठगी करने वाले घोटाले में लगातार इजाफा हुआ है। 1500 से ज्यादा पीड़ितों को 7.5 करोड़ डॉलर की हानि हुई है।’

संघीय एजेंसियों ने 140 घोटालेबाजों की पहचान की, जिसमें पटेल भी शामिल था।

ठगी करने के लिए भारत से अमेरिकियों को की जाने वाली कॉल से देश की बैक ऑफिस, टेक सपोर्ट और कॉल सेंटर के हब के रूप में छवि को नुकसान पहुंचा है।

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