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आजमगढ़ से चुनावी रण में उतरने जा रहे ‘निरहुआ’ अखिलेश के खिलाफ लड़ेंगे चुनाव

वाराणसी। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव इस बार आजमगढ़ से चुनावी रण में उतरने जा रहे हैं, उनके खिलाफ इस सीट पर भाजपा ने भोजपुरी के सुपर स्टार निरहुआ को टिकट दिया है, टिकट मिलते ही निरहुआ का उत्साह चरम सीमा पर है, उन्होंने अपने नाम के आगे चौकीदार शब्द जोड़ लिया है और आते ही बड़े जोश के साथ उन्होंने अखिलेश यादव को नसीहत भी दे डाली। भोजपुरी स्टार ने कहा कि अखिलेश भैया आप तो बस सैफई संभालो, हम आजमगढ़ संभाल लेंगे।

आजमगढ़
अखिलेश यादव के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे ‘निरहुआ’
उन्होंने बीजेपी नेताओं को धन्यवाद देते हुए अपना आभार व्यक्त किया और लोगों से बीजेपी के लिए वोट करने की अपील की, निरूहुआ ने कहा कि हम आजमगढ़ लोकसभा की चौकीदारी करने को तैयार हैं। आपको बता दें कि भले ही आज ‘निरहुआ’, चुनावी अखाड़े में अखिलेश यादव के आमने-सामने हों लेकिन अखिलेश सरकार ने ही ‘निरहुआ’ को उनके बेहतरीन काम के लिए ‘यशभारती पुरस्कार’ से सम्मानित किया था।

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आजमगढ़ लोकसभा सीट
भोजपुरी फिल्मों के सुपर स्टार हैं ‘निरहुआ’

बताते चलें कि भोजपुरी फिल्मों के सुपर स्टार दिनेश लाल यादव उर्फ ‘निरहुआ’ को भारतीय जनता पार्टी ने आजमगढ़ लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है। बुधवार को भाजपा ने उम्मीदवारों की 16वीं लिस्ट जारी की जिसमें 6 प्रत्याशियों के नाम हैं, लिस्ट में आजमगढ़ से ‘निरहुआ’ को मैदान में उतारा गया है।

दिनेश लाल यादव गाजीपुर के छोटे से गांव टंडवा से ताल्लुक रखते हैं
कौन हैं ‘निरहुआ’

भोजपुरी फिल्मों के सुपर स्टार कहे जाने वाले ‘निरहुआ’ का पूरा नाम दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ है, इनका जीवन भी काफी संघर्षमय रहा है, दिनेश लाल यादव गाजीपुर के छोटे से गांव टंडवा से ताल्लुक रखते हैं। प्रख्यात बिरहा गायक विजय लाल यादव इनके बड़े भाई हैं। भोजपुरी ‘अल्बम निरहुआ सटल रहे ‘ से ‘निरहुआ’ को अपार प्रसिद्धि मिली थी। इनकी दो फिल्मों ‘निरहुआ चलल ससुराल-3’ और ‘ ‘निरहुआ चलल अमेरिका’ ने इन्हें रातों रात सुपर स्टार बना दिया। यह बिग बॉस शो के भी कंटेस्टेंट रह चुके हैं।

सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव सांसद हैं आजमगढ़ से
आजमगढ़ सीट का महत्व

उत्तर प्रदेश की आजमगढ़ लोकसभा सीट से इस वक्त उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव सांसद हैं। साल 2014 के चुनाव में मुलायम सिंह यादव ने यहां भाजपा के कैंडिडेट रमाकांत यादव, बसपा के शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली और काग्रेंस के उम्मीदवार अरविंद कुमार जायसवाल को भारी मतों से हराया था लेकिन इस बार उनके बड़े बेटे अखिलेश यादव इस सीट पर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

1952 से 1971 तक हुए आमचुनावों में कांग्रेस ने यहां लगातार पांच बार जीत दर्ज की है
यादवों का गढ़ है आजमगढ़

इस सीट के इतिहास पर नजर डालने पर पता चलता है कि 1952 से 1971 तक हुए आमचुनावों में कांग्रेस ने यहां लगातार पांच बार जीत दर्ज की है, 1977 के चुनावों में कांग्रेस का विजय रथ जनता पार्टी के राम नरेश यादव ने रोका था लेकिन अगले ही साल यहां उपचुनाव हुए और कांग्रेस की मोहसिना किदवई ने निर्वाचित होकर यहां इतिहास रचा , वो आजमगढ़ की पहली महिला सांसद बनी। 1980 में जनता पार्टी(सेक्युलर) ने जीत दर्ज की। 1984 में संतोष कुमार ने जीत हासिल करके कांग्रेस का इन्तज़ार ख़त्म किया। 1989 में यहां से राम कृष्ण यादव बहुजन समाज पार्टी और 1991 में चंद्रजीत यादव जनता पार्टी की टिकट पर जीतकर लोकसभा पहुंचे। 1996 से 2004 तक कभी सपा ने बसपा को हराकर तो कभी बसपा ने सपा को हराकर आजमगढ़ की सीट पर कब्ज़ा किया। 2008 में यहां उपचुनाव हुए जिसमें बसपा के अकबर अहमद निर्वाचित हुए। 2009 में समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद रमाकांत यादव भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर लड़े और आज़मगढ़ में भाजपा को पहली बार जीत दिलाई। साल 2014 में मैनपुरी की सीट के साथ-साथ मुलायम सिंह यादव ने आज़मगढ़ से चुनाव लड़ा और जीत का नया इतिहास भी लिखा।

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