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‘आयरन लेडी’ के नाम से जानी जाने वालीं नतालिया फिलेवा की विमान हादसे में मौत

रूसी उड्डयन उद्योग में ‘आयरन लेडी’ के नाम से जानी जाने वालीं नतालिया फिलेवा की विमान हादसे में मौत हो गई। उनका विमान दक्षिण-पश्चिम जर्मनी स्थित एजेलबाश शहर के पास दुर्घटना का शिकार हो गया। छह सीटों वाले इस विमान में पायलट के अलावा 55 साल की नतालिया और उनके पिता सवार थे। विमान दुर्घटना में तीनों की मौत हो गई। नतालिया अपने पिता को इलाज के लिए फ्रांस से जर्मनी लेकर जा रही थीं।

जर्मन अधिकारियों के मुताबिक पायलट ने टर्न लेने के दौरान विमान पर नियंत्रण खो दिया, जिससे यह हादसा हुआ। मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है। विमान दुर्घटना के बाद मौके पर जा रही पुलिस की एक कार भी दुर्घटना ग्रस्त हो गई। इसमें दो लोगों की जान गई।

नतालिया लेती थी कंपनी के फैसले

नतालिया और उनके पति व्लादिस्लाव फिलेवा साइबेरिया एयरलाइंस (एस7 एयरलाइंस) के सह मालिक थे। नतालिया का नेट वर्थ 60 करोड़ डॉलर (करीब 4154 करोड़ रुपए) थी। परिवार में व्लादिस्लाव के अलावा चार बच्चे भी हैं। इसमें एक गोद ली हुई लड़की भी है। रूसी नागरिक उड्डयन उद्योग क्षेत्र में यात्रियों के लिए सुविधाएं और सुरक्षा बढ़ाने पर जोर देने के कारण नतालिया को ‘आयरन लेडी’ कहा जाता था।

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26 देशों के 181 शहरों में है एस7 की सर्विस 

एस7 को साइबेरिया एयरलाइंस भी कहा जाता है। यह रूस की दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइंस कंपनी है और इसके पास 96 विमान हैं। दुनिया के 26 देशों के 181 शहरों में यह कंपनी अपनी सेवा मुहैया करती है। रूस की सबसे बड़ी विमानन कंपनी एयरोफ्लोत की यह सबसे प्रमुख प्रतिद्वंद्वी है। एयरोफ्लोत रूस की सरकारी कंपनी है।

सोवियत विघटन के बाद खरीदी थी एयरलाइन 

नतालिया ने सोवियत संघ के विघटन के बाद साइबेरिया एयरलाइंस का अधिग्रहण किया था। एस7 एयरलाइंस करीब एक दशक तक वन वर्ल्ड अलायंस का हिस्सा रही थी। इस अलायंस में अमेरिका, ब्रिटेन और जापान की कंपनी भी थी।

कंपनी का स्टाफ मम्मा कहकर बुलाता था 

नतालिया और उनके पति एयरलाइंस के स्टाफ में भी काफी लोकप्रिय थे। स्टाफ उन्हें मम्मा और पापा बुलाते था। विशेषज्ञ एयरलाइंस की सफलता के पीछे नतालिया की मेहनत और दूरदर्शिता को सबसे बड़ी वजह बताते हैं।

नतालिया ने भ्रष्टाचार के खिलाफ उठाई आवाज

रूस में भ्रष्टाचार के खिलाफ चले आंदोलन में भी नतालिया मुखर थीं। एक बार उन्होंने कहा था, “आप इन अधिकारियों से पूछिए कि वे एक-एक हजार डॉलर के जूते और सूट खरीदने के लिए पैसे कहां से लाते हैं।”

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