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अध्यादेश 2019 के खिलाफ दायर याचिका को जस्टिस एसए बोबडे की खंडपीठ ने किया खारिज

केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों और शिक्षक कैडर में 200 प्वाइंट रोस्टर की बहाली वाले आरक्षण अध्यादेश 2019 के खिलाफ दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। सोमवार को इस याचिका को जस्टिस एसए बोबडे की खंडपीठ ने खारिज कर दिया। वकील प्रिया शर्मा और पृथ्वीराज चौहान ने याचिका में आरक्षण अध्यादेश के तहत 200 प्वाइंट रोस्टर पर रोक लगाने की मांग की थी। याचिका में ऑर्डिनेंस को मौलिक अधिकार का उल्लंघन बताते हुए इसे खत्म करने की मांग की गई है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में आरक्षण रोस्टर का निर्धारण विवि को यूनिट मानकर तय करने की बजाय विभाग को यूनिट मानकर तय करने का निर्देश दिया था। इसके बाद यूजीसी ने सभी विवि को आदेश जारी कर विभागवार आरक्षण रोस्टर तैयार करने का निर्देश दिया था। इसका काफी विरोध हुआ था। जिसके बाद सरकार अध्यादेश लेकर आई जिसमें विभाग की बजाय विश्वविद्यालय को इकाई मानते हुए पुरानी व्यवस्था को ही लागू किया गया।

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200 सूत्री रोस्टर प्रणाली में पूरे विश्वविद्यालय को एक इकाई मानकर और किसी श्रेणी विशेष के सभी पदों को मिलाकर आरक्षण कोटे का आकलन किया जाता है। 13 प्वाइंट रोस्टर प्रणाली के तहत शिक्षकों के कुल पदों की गणना विश्वविद्यालय या कॉलेज के अनुसार ना करके विभाग के विषय के हिसाब से की जाती।

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