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देशभर के करोड़ों किसानों को मिल सकता है आधार का फायदा

आधार का प्रचार करने वाले नए सरकारी टीवी और रेडियो अभियान में यह बताया जा सकता है कि किस तरह देशभर के करोड़ों किसानों को इसका फायदा मिल सकता है। इसमें बताया जा सकता है कि वे पीएम किसान निधि सम्मान स्कीम के तहत मिलने वाली 6,000 रुपये सालाना की आर्थिक मदद आधार से जुड़े अपने खाते में सीधे पा सकते हैं।


मिनी फिल्म और ऑडियो स्पॉट वाले इस अभियान में फोकस यह बताने पर होगा कि कैसे आधार से इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने में आसानी हुई है क्योंकि इसके जरिए आईटीआर को चुटकियों में वेरिफाई किया जा सकता है। टैक्स असेसी को अब फाइल की गई रिटर्न की फिजिकल कॉपी को बेंगलुरु के प्रोसेसिंग सेंटर में नहीं भेजना पड़ता। इस साल के आधार अभियान में शामिल होने वाले बिडर्स को ऐसी सूचना दी गई है।

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सुप्रीम कोर्ट के एक ऑर्डर पर कई सेवाओं के लिए आधार की अनिवार्यता खत्म की जा चुकी है। इसके अनिवार्य इस्तेमाल को सरकारी सब्सिडी और सर्विसेज तक सीमित कर दिया गया है। सरकार ने तय किया था कि वह पीएम किसान निधि सम्मान योजना की पहली किस्त बांटने के लिए आधार एनरोलमेंट नंबर को स्वीकार करेगी, लेकिन दूसरी किस्त के लिए आधार नंबर जरूरी होगा।
यूनियन कैबिनेट ने बेनेफिशियरी के डेटा को आधार से जोडऩे की अनिवार्यता योजना की तीसरी किस्त और उसकी अगली किस्त पर ही लागू करने के लिए 28 फरवरी को संबंधित नियमों को उदार बनाया था। सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया था कि किसानों में अंसतोष न पनपे क्योंकि सीडिंग के लिए बायोमीट्रिक ऑथेंटिकेशन जरूरी होता है।

पीएम किसान निधि सम्मान योजना के तहत देश के 12 करोड़ किसानों को तीन किस्तों में कुल 6,000 रुपये मिलेंगे और यह रकम सीधे उनके आधार लिंक्ड बैंक खाते में आएगी। आधार वाली शर्त इसलिए रखी गई है कि किसानों के लिए आई अब तक की सबसे बड़ी योजना में फ्रॉड और लीकेज न हो। पीएम-जेएवाई आयुष्मान भारत स्कीम के तहत मेडिकल इंश्योरेंस सर्विसेज के लिए भी आधार को अनिवार्य बनाया गया है।
यूआईडीएआई के ऑनलाइन डैशबोर्ड के मुताबिक पिछले साल नवंबर में यूजर्स की तरफ से कराए जाने वाले आधार ऑथेंटिकेशन की संख्या साल के सबसे निचले स्तर पर आ गई थी। 26 सितंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर आने के बाद नवंबर में सिर्फ 82.4 करोड़ ऑथेंटिकेशन हुए थे जो जनवरी 2019 में बढ़कर 96.4 करोड़ हो गए लेकिन फरवरी में फिर 86.8 करोड़ पर आ गए।

सरकारी अधिकारियों ने बताया कि लोगों ने कई सेवाओं के लिए फिर से आधार का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। शायद इसी वजह से सरकार ने 28 फरवरी को ऐसा अध्यादेश जारी किया जिसमें धारक की इजाजत के साथ उनके आधार नंबर के फिजिकल या इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में इस्तेमाल को स्वैच्छिक बना दिया गया। अब टेलीग्राफ एक्ट 1885 और प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 के तहत केवाईसी डॉक्युमेंट ऑथेंटिकेशन के लिए स्वैच्छिक रूप से आधार का इस्तेमाल किया जा सकेगा।

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