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सिटीजनशिप बिल के विरूद्ध जनता दल यूनाइटेड समेत बीजेपी के सात सहयोगी दल

सिटीजनशिप बिल के विरूद्ध जनता दल यूनाइटेड समेत बीजेपी के सात सहयोगी दल  उत्तर-पूर्व के 10 पार्टियों ने मोर्चा खोल दिया है. मंगलवार को इन पार्टियों ने संयुक्त रूप से चर्चा की. इन दस पार्टियों में से असम गण परिषद्, नागा पीपल्स फ्रंट (एनपीएफ) बीजेपी के सहयोगी रह चुके हैं तो खनाम का बीजेपी शासित मेघालय में असर है. एजीपी  एनपीएफ ने सभी पार्टियों के मीटिंग में बोला कि उनका कोशिश होगा कि केंद्र का सिटिजनशिप बिल राज्यसभा में गिर जाए.

बताते चलें कि केंद्र गवर्नमेंट का सिटिजनशिप बिल बांग्लादेश, पकिस्तान  अफगानिस्तान के गैर हिंदुओं को धार्मिक आधार पर नागरिकता प्रदान करता है. उत्तर-पूर्व के पार्टियों की मीटिंग में बीजेपी के कई सहयोगी शामिल हुए. इनमें मिजोरम का मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ), एनपीपी, यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी, हिल स्टेट पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी,  मेघालय का पीपल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट, नागालैंड का नेशनल डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी  त्रिपुरा का स्वदेशी पीपल्स फ्रंट शामिल है.

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मेघालय के CM कोनार्ड संगमा इस बिल का विरोध करने वाले शुरूआती लोगों में शामिल थे. उन्होंने बोला कि सभी पार्टियां अपने-अपने राज्यों में विरोध कर रही थी. हमने उन्हें साथ आकर एक आवाज में बात उठाने को बोला है. कोनार्ड की एनपीपी  बीजेपी ने पिछले वर्ष मिलकर मेघालय में गवर्नमेंट बनाई थी. बैठक में दो प्रस्ताव पास हुए, पहला कि अगर यह बिल राजयसभा में पास हो गया तो एक प्रतिनिधि मंडल राष्ट्रपति से मुलाकात करेगा  पीएम से भी इस मुद्दे पर चर्चा करेगा. दूसरा सभी पार्टियां एक कमेटी बनाएगी जो इस बिल के विरूद्ध जनभावना को एक करेगी.

सिटीजनशिप बिल पर बीजेपी से अनबन के बावजूद आने वाले आमचुनाव से पहले उत्तर-पूर्व में बीजेपी के विरूद्ध साझेदारी बनाने के सवाल पर कोनार्ड ने बोला कि हम इससे पॉलिटिक्स को दूर नहीं रख सकते. सभी पार्टियों ने इस बैठक से पहले उत्तर-पूर्व जनतांत्रिक साझेदारी के संयोजक हेमंत बिस्वा को इसकी जानकारी दी  बोला कि हमारा मुख्य दायित्व जनता के प्रति है.

मिजोरम के CM  मिजो नेशनल फ्रंट के मुखिया जोरमथांगा ने बोला कि यह बिल हमारे लिए खतरनाक  हानिकारक है. उन्होंने बीजेपी के साथ अपने साझेदारी को लेकर भी चेतावनी दी. एजीपी प्रमुख अतुल बोरा ने सभी परियों के इस मीटिंग को ऐतिहासिक करार दिया. असम गण परिषद् ने लोकसभा में सिटिजनशिप बिल पास होने के बाद इस महीने बीजेपी से साझेदारी तोड़ लिया था.

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