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मोदी सरकार के खिलाफ मैदान में उतरे अन्ना हजारे, कर रहे लोकपाल की मांग

समाजसेवी अन्ना हजारे ने आज यानी 30 जनवरी से लोकपाल की मांग को लेकर अनशन शुरू कर दिया है। अन्ना हजारे महाराष्ट्र स्थित अपने गांव रालेगण सिद्धि में अनशन पर बैठे हैं। मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए अन्ना हजारे ने कहा था कि अगर सरकार चाहती तो क्या लोकपाल कानून लाने में पांच साल लगते। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को चिट्ठी लिखकर अन्ना ने बताया था कि वे अहमदनगर जिले के अपने गांव रालेगण सिद्धि में अनशन पर बैठने जा रहे हैं।

पत्र में अन्ना हजारे ने लिखा है कि लोकपाल एक्ट को पास हुए 5 साल हो गए लेकिन मोदी सरकार ने कोई लोकपाल नियुक्त नहीं किया। उन्होंने लिखा कि महाराष्ट्र में पिछले 4 साल से लोकायुक्त एक्ट पास नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार पांच साल बाद बार-बार बहानेबाजी कर रही है। अन्ना हजारे ने स्पष्ट किया कि उनका ये अनशन किसी व्यक्ति, पक्ष, पार्टी के विरुद्ध में नहीं है।

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अन्ना ने आरोप लगाया है कि सरकार लोकायुक्त कानून 2013 और लोकपाल को लेकर संवैधानिक संगठनों के निर्णय पर ध्यान नहीं दे रही है और देश को तानाशाही की तरफ ले जाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार को सत्ता में आए पांच साल हो गए। केवल लोकपाल विधेयक को लागू करने की जरूरत थी, लेकिन इस नियुक्ति में किसी ना किसी कारण से देरी होती रही। ये सब केवल बहानेबाजी है।

अन्ना हजारे ने कहा कि वो समाज और देश की भलाई के लिए बार-बार आंदोलन करते आ रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे। गौरतलब है कि साल 2011-12 में अन्ना हजारे के दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ा आंदोलन किया। केंद्र की यूपीए सरकार के खिलाफ अन्ना हजारे ने जोरदार आंदोलन किया। अन्ना हजारे के इस आंदोलन के बाद कई नए राजनीतिक चेहरों का उदय हुआ। दिल्ली की सरकार में शामिल कई मंत्री, राजनेता और मुख्यमंत्री अन्ना हजारे के आंदोलन से निकले। अरविंद केजरीवाल भी इसी आंदोलन के बाद राजनीति में सक्रिय हुए।

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