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सांख्यिकी आयोग के दो सदस्यों ने दिया इस्तीफा

राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के दो स्वतंत्र सदस्यों पी सी मोहनन और जे वी मीनाक्षी ने सरकार के साथ कुछ मुद्दों पर असहमति के चलते इस्तीफा दे दिया. मोहनन आयोग के कार्यकारी चेयरपर्सन भी थे. दो सदस्यों के छोड़ने के बाद अब आयोग में केवल दो सदस्य- मुख्य सांख्यिकीविद प्रवीण श्रीवास्तव और नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत बचे हैं. अधिकारी ने कहा, दो सदस्यों ने राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग आयोग से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने 28 जनवरी 2019 को इस्तीफा दिया. सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अधीन आने वाले आयोग में सात सदस्य होते हैं. वेबसाइट के मुताबिक, तीन पद पहले से ही खाली हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, वर्ष 2017-18 के लिए रोजगार और बेरोजगारी पर एनएसएसओ (नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गनाइजेशन) के पहले वार्षिक सर्वेक्षण को रोकने के खिलाफ विरोध करते हुए दो सदस्यों से इस्तीफा दिया है. इस रिपोर्ट में नोटबंदी के बाद रोजगार का डाटा था. एनएससी एक स्वायत्त निकाय है जो देश की सांख्यिकीय प्रणालियों के कामकाज की निगरानी और समीक्षा का काम करता है.

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2006 में इस संस्था का गठन किया गया था. तीन साल पहले, जीडीपी बैक सीरीज डेटा को अंतिम रूप देने के मामले में नीति आयोग ने इसकी आलोचना की थी. इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में पी सी मोहनन ने कहा कि सामान्य तौर पर एनएसएसओ आयोग को findings (निष्कर्ष) प्रस्तुत करता है. एक बार अनुमोदित होने के बाद, रिपोर्ट अगले कुछ दिनों के भीतर जारी की जाती है.

मोहनन ने कहा, हमने दिसंबर की शुरुआत में रोजगार/बेरोजगारी पर एनएसएसओ के सर्वेक्षण को मंजूरी दी थी, लेकिन रिपोर्ट को लगभग दो महीने तक सार्वजनिक नहीं किया गया. एक समय के बाद लगने लगा कि सरकार एनएससी को गंभीरता से नहीं ले रही है. महत्वपूर्ण फैसले लेते समय एनएससी को बाहर रखा जाने लगा. हम अपने कर्तव्यों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करने में असमर्थ थे. 2017-18 के नौकरी के सर्वेक्षण में रोजगार के मोर्चे पर अच्छी तस्वीर पेश नहीं की गई थी. एनएसएसओ के एक सूत्र ने बताया कि इस रिपोर्ट को रोकने के पीछे इसकी सबसे अधिक संभावना है.

राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (एनएससी) के दो सदस्यों के इस्तीफे के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने बुधवार को नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा और कहा कि ‘इस संस्था की आत्मा को शांति मिले, जब तक कि इसका दोबारा जन्म ना हो जाए.’ पूर्व वित्त मंत्री ने ट्वीट कर कहा, हम राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग की मौत का शोक मनाते हैं. साफ-सुथरे जीडीपी डेटा और रोजगार डेटा को रिलीज करने के लिए इसकी साहसिक लड़ाई को आभार के साथ याद करते हैं. उन्होंने कहा, ‘इस आयोग की आत्मा को शांति मिले, जब तक कि इसका दोबारा जन्म ना हो जाए.

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