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कमरे के बाहर देखने को मिला नया नजारा, कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच हुई जमकर मुक्केबाजी

राजस्थान के जालोर संसदीय क्षेत्र में विधानसभा चुनाव 2018 में हुई करारी हार को भुलाकर आगामी लोकसभा चुनाव 2019 में एकजुट होने का संदेश देने आए कांग्रेस प्रदेश सह प्रभारी विवेक बंसल की मौजूदगी में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच जमकर मुक्केबाजी भी हुई।

सह प्रभारी बंसल उस दौरान बंद कमरे में कार्यकर्ताओं से lok sabha elections 2019 को लेकर फीडबैक ले रहे थे। इधर, हंगामा होने की जानकारी मिली तो उन्होंने बाहर आकर कार्यकर्ताओं से समझाइश की। इसके बाद कुछ देर तक बंद कमरे में कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेकर बंसल यहां से रवाना हो गए। हालांकि जब इस हंगामे को लेकर पत्रकारों ने बंसल से बातचीत की तो इतना ही बोले कि मैं कमरे के अंदर बैठा था, मैंने कुछ देखा नहीं। इससे पहले उन्होंने बंद कमरे में एक-एक कार्यकर्ता को बुलाकर लोकसभा चुनाव जीतने की गणित व उम्मीदवारों के बारे में फीडबैक लिया।

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(Jalore Lok Sabha constituency) जालोर लोकसभा क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे कांग्रेस कार्यकर्ताओं से उन्होंने कहा कि राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 में जो हुआ उसे भूल जाओ और आम चुनाव 2019 पर ध्यान दो। इधर, बाद में परिसर में 2018 के चुनाव में हुई हार को लेकर कार्यकर्ताओं का गुस्सा फिर फूट पड़ा। इस दौरान सोमेंद्र गुर्जर, पूर्व सांसद पारसाराम मेघवाल, पूर्व जिला प्रमुख मंजू मेघवाल, महासचिव कल्याणसिंह बोकड़ा, जितेन्द्र कसाना, सवाराम, लालसिंह धानपुर, हुकमीचंद माली, सेवादल प्रभारी रामसिंह राव, लक्ष्मणसिंह, शैलेन्द्रसिंह, पन्नेसिंह पोषाणा, अमीन मोयला, सलीम खां, विनय व्यास, शिवनारायण बिश्नोई, श्रवण ढाका, गणपत ढाका, आमसिंह समेत कांग्रेस के विभिन्न प्रकोष्ठों के पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित थे।

इसलिए शुरू हुई मुक्केबाजी
सहप्रभारी विवेक बंसल, पर्यावरण मंत्री सुखराम बिश्नोई जालोर पहुंचे। जहां राजीव गांधी भवन में कार्यकर्ताओं को संबोधित करने के बाद सहप्रभारी बंसल अकेले कमरे में चले गए और एक-एक कार्यकर्ता को बुलाया। करीब तीन घंटे तक यह दौर चलता रहा।

वर्ष 2013 में भीनमाल से कांग्रेस प्रत्याशी रहे ऊमसिंह चांदराई भी राजीव गांधी भवन पहुंचे। यहां जिलाध्यक्ष डॉ. समरजीत सिंह, रतन देवासी, उपाध्यक्ष सोहनसिंह देवड़ा समेत कांग्रेस पदाधिकारियों से चर्चा करने के बाद वे भी बंसल से मुलाकात करने कमरे में जाने लगे। इसी दौरान लाइन में खड़े भीनमाल के पूर्व प्रधान देराम बिश्नोई ने नारेबाजी शुरू कर दी।

बिश्नोई बोले -गद्दारों को बाहर निकालो

बिश्नोई बोले जो कांग्रेसी नहीं है वे अंदर क्यों जा रहे हैं। वे यहीं नहीं रुके और बोले गद्दारों को बाहर निकालो। उनके ऐसा बोलते ही पीछे लाइन में खड़े ऊमसिंह के समर्थक भी आपस में उलझ गए। इससे दोनों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई।

इस दौरान वहां कार्यकर्ताओं में भगदड़ सी मच गई। दोनों पक्षों में करीब तीन मिनट तक मुक्केबाजी और बहसबाजी होती रही। इस बीच जिलाध्यक्ष डॉ. समरजीतसिंह व ऊमसिंह ने कार्यकर्ताओं से समझाइश का प्रयास किया, लेकिन कार्यकर्ता आपस में उलझते रहे। इस पर सह प्रभारी बंसल को बाहर आकर सभी को शांत करना पड़ा। इससे पहले 13 जनवरी को जिला प्रभारी मंत्री भंवरसिंह भाटी की मौजूदगी में हुई बैठक में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गद्दारों को बाहर निकालो जैसे नारेबाजी कर गुस्सा उतारा था।

2013 से आपसी मतभेद आज भी बरकरार

दरअसल, कांग्रेस जिलाध्यक्ष डॉ. समरजीसिंह और ऊमसिंह चांदराई के बीच वर्ष 2013 से ही आपसी मतभेद हैं। वर्ष 2013 में कांग्रेस ने डॉ. सिंह का टिकट काटकर ऊमसिंह को भीनमाल से प्रत्याशी बनाया था, लेकिन ऊमसिंह हार गए। तब उनके समर्थकों ने डॉ. सिंह पर भीतरघात के आरोप लगाए। उसके बाद से दोनों के बीच अनबन शुरू हो गई।

विधानसभा चुनाव 2018 में भी फीडबैक लेने आए विवेक बंसल के सामने इन दोनों के समर्थकों के बीच बहसबाजी हुई थी। बाद में 2018 में कांग्रेस ने ऊमसिंह का टिकट काटकर डॉ. समरजीतसिंह को पुन: टिकट दिया, लेकिन डॉ. सिंह भी चुनाव हार गए। ऐसे में इस बार डॉ. सिंह के समर्थक ऊमसिंह पर भीतरघात के आरोप लगा रहे हैं।

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