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इन चुनावों में अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए पूर्णरूप से कमर कस चुके राजनीतिक दल

लगभग सभी राजनीतिक दल इन चुनावों में अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए पूर्णरूप से कमर कस चुके हैं भी सभी पार्टियों के लिए बड़ी चुनौती के रूप में है वैसे तो यह शहर राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ (आरएसएस) का गढ़ रहा है, लेकिन  इस समय यहां से सांसद हैं

6 विधानसभा एरिया हैं नागपुर में
महाराष्‍ट्र की नागपुर लोकसभा सीट के भीतर 6 विधानसभा एरिया आते हैं इनमें नागपुर साउथ वेस्‍ट (52), नागपुर साउथ (53), नागपुर ईस्‍ट (54), नागपुर सेंट्रल (55), नागपुर वेस्‍ट (56), नागपुर नॉर्थ (57) शामिल हैं

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अधिकतर जीती है कांग्रेस 
1951 में अस्तित्व में आने के बाद से अब तक यहां अधिकांश मौकों पर कांग्रेस पार्टी ने ही परचम लहराया है संघ मुख्यालय होने के बावजूद यहां से सिर्फ दो बार ही भाजपा के उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है 1996 में पहली बार यहां भाजपा ने अपना खाता खोला था 1996 में इस लोकसभा सीट से भाजपा के उम्‍मीदवार बनवारीलाल पुरोहित ने जीत दर्ज की थी इसके दूसरी यह सीट 2014 तक कांग्रेस पार्टी के पास रही

2014 में गडकरी ने जीता चुनाव
2014 में नितिन गडकरी यहां से लोकसभा चुनाव जीता  भाजपा का खाता यहां दूसरी बार खुला वर्ष 2009 में कांग्रेस पार्टी के विलास मुत्तेमवार ने यहां से जीत दर्ज की मुत्तेमवार यहां से लगातार चौथी बार सांसद चुने गए थे

यह है जातीय समीकरण
राजनीतिक विश्‍लेषकों के मुताबिक नागपुर में जातीय समीकरण ही राजनीतिक दल की जीत तय करता है इनके मुताबिक नागपुर में सवर्णों की संख्‍या अधिक है इसलिए यहां दलित उम्‍मीदवार हमेशा पीछे रह जाते हैं यहां दलित उम्‍मीदवार महज एक या दो सीटें ही जीत पाते हैं

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