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बाबरी मस्जिद का अब हुआ ऐसा हाल…

1947 में जब भारत आज़ाद हुआ और देश को दो टुकड़े हुए तो जब से ज़्यादा तबाही और बर्बादी हरियाणा-पंजाब में हुई। जहां से मुसलमान अपने आलीशान महलों और खूबसूरत मस्जिदों को छोड़कर पाकिस्तान चले गए या फिर गदर में मारे गए।

हरियाणा-पंजाब में मुलसमानों की संख्या का अंदाज़ा वहां पर गैर आबाद मस्जिदों से लगाया जासकता है कि कितनी बड़ी संख्या में यहां मुसलमान आबाद रहे थे। आलीशान मस्जिदों के खूबसूरत मीनार जाने वालों से शिकवा और तबाही का हाल बयान कर रहे है।

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पानीपत भारत का ऐतिहासिक शहर है जहां मुसलमान बहुत बड़ी संख्या रहते थे कई बड़े मदरसे और मरकज़ यहां क़ायम थे जो गदर के समय बर्बाद होगए हैं,इस ऐतिहासिक शहर में मस्जिदें,दरगाहें, इमारतें मुसलमानों की शान और शौकत की गवाही देती हैं।

देश के बंटवारे के बाद से ये मस्जिदें सजदा करने वालो को तरस गई हैं,यहां गूँजने वाली आज़ान से मिम्बर और मेहराब तरस रहे है, अधिकतर मस्जिदें सही रख रखाव और नशेड़ियों हुड़दंगियों का अड्डा बनी हुई है।

सुल्तान बाबर ने 1526 में इब्राहिम लोधी से जंग जीतने पर खुशी में एक खूबसूरत मस्जिद का निर्माण करवाया था, बड़े खूबसूरत अंदाज़ में बनी मस्जिद का प्रवेश द्वार उत्तर में है। लाल बालू के रंग व ईंटों से बने मुख्य द्वार के सामने बड़ा मेहराब बना हुआ है। इसकी गुंबदों पर पुष्पाकार गोलाकारी फलक उत्कीर्ण है। मुख्य मेहराब काफी बड़ा है । इसके पाश्र्व में उप भवन है। प्रत्येक उप भवन में नौ दीप और नौ आले हैं।

इन पर अर्ध चंद्राकार गुंबद मौजूद है। केंद्रीय प्रार्थना कक्ष के मेहराब के दोनों ओर कोठरियां हैं। इन पर पवित्र कुरान की आयतें उद्धृत हैं। सलीम शाह को पराजित करने के बाद हुमायूं ने एक मंच बनवाया। इसे चबूतरा-ए-फतेह मुबारक कहा जाता है। इस पर हिजरी 934 (1527) अभिलेख है।

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