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आतंक की राह छोड़कर सैनिक बने नजीर वानी को मिला अशोक चक्र

केंद्र सरकार ने देश के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार अशोक चक्र के लिए लांस नायक नजीर वानी को चुना है. आतंक की राह छोड़कर सैनिक बने कश्मीर के वानी घाटी में ऑपरेशन के दौरान शहीद हो गए थे.

वानी अशोक चक्र पाने वाले पहले कश्मीरी होंगे. पिछले साल नवंबर में कश्मीर के हीरापुर गांव में आतंकियों के खिलाफ अदम्य साहस दिखाने के लिए उन्हें यह पुरस्कार दिया जा रहा है. शहीद वानी के इस पुरस्कार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद रिपब्लिक डे पर वानी की पत्नी की महजबीन को सौंपेंगे.

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2004 में सेना में शामिल हुए थे वानी

आंतक की राह छोड़कर नजीर वानी 2004 में टेरिटोरियल सेना में शामिल हुए थे. बाद में वह राष्ट्रीय राइफल्स का हिस्सा बन गए थे. 25 नवंबर को आतंकियों के खिलाफ एक ऑपरेशन में उन्होंने लश्कर-ए-तैयबा के डिस्ट्रिक्ट कमांडर और एक अन्य विदेशी आतंकी को मार गिराया था. इस ऑपरेशन में कुल 6 आतंकी मारे गए थे. ऑपरेशन के दौरान उन्हें कई गोलियां लगीं, इसके बाद भी वह पीछे नहीं हटे.

पहले भी मिला था वीरता का पुरस्कार

इससे पहले भी उन्हें वीरता के प्रदर्शन के लिए 2007 और 2018 में सेना मेडल मिला था. 2018 का सेना मेडल उन्हें बेहद पास से एक आतंकी को मार गिराने के लिए मिला था. सेना के एक अधिकारी ने कहा, ”वानी शुरू से ही एक हीरो थे और उन्होंने अपने राज्य में शांति कायम करने के लिए काम किया.”

वानी की पत्नी ने कही ये बात

शहीद नजीर वानी के परिवार में उनकी पत्नी के अलावा उनके दो बच्चे भी हैं. वानी की पत्नी महजबीन ने बताया, ”दो दिन पहले तक मुझे पता नहीं था कि अशोक चक्र जैसा कोई अवॉर्ड होता है. मुझे खुशी है कि उन्हें (नजीर वानी को) अवॉर्ड मिल रहा है, लेकिन उनके ना होने की भरपाई नहीं हो सकती.”

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