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हिंदुस्तान गवर्नमेंट के जरिए की गई बातचीत पर बोले जनरल रावत

भारतीय सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत का कहना है कि उनके पाकिस्तानी समकक्ष जनरल कमर बाजवा को हिंदुस्तान गवर्नमेंट के जरिए ही वार्ता करनी होगी. उन्होंने उन खबरों को खारिज कर दिया जिसमें बोला गया था कि पिछले वर्ष पाक सेनाप्रमुख ने उन्हें वार्ता का प्रस्ताव दिया था. बुधवार को उन्होंने कहा, ‘लेफ्टिनेंट जनरल कमर बाजवा हिंदुस्तान गवर्नमेंटके जरिए मुझसे संपर्क कर सकते हैं  हम यह निर्णय करेंगे कि वार्ता की जानी चाहिए या नहीं. मैं न हां बोल रहा हूं  न नहीं.

जनरल रावत ने कहा, ‘मैं एक सैनिक हूं  सीधी बात करता हूं. मुझसे जब संपर्क किया जाएगा तभी मैं निर्णय लूंगा.‘ उन्होंने इस ओर संकेत किया कि आतंक  बातचीत साथ नहीं हो सकती. कई मीडिया रिपोर्ट्स जिसमें न्यूयॉर्क टाइम्स भी शामिल था उसमें बोला गया था कि पश्चिमी कूटनीतिक  पाकिस्तानी स्रोतों के अनुसार, जनरल बाजवा ‘पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय अलगाव  लड़खड़ाती हुई अर्थव्यवस्था को लेकर चिंतित हैं. शांति बातचीत को फिर से प्रारम्भ करने के लिए वह हिंदुस्तान पहुंचे लेकिन उन्हें उत्साहहीन रिएक्शनमिली.

अखबार की रिपोर्ट में बोला गया है कि दोनों सेनाध्यक्ष एक दशक तक संयुक्त देश शांति सेना में अपनी सेवा दे चुके हैं. रावत ने कहा, ‘मैं इंडियन सेना का अध्यक्ष हूं. गवर्नमेंट का पक्ष मेरा पक्ष है. बहुत से ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब दिए जाने बाकी हैं. मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि क्या वह (जनरल बाजवा) हाफिज सईद  मसूद अजहर के विरूद्ध कार्रवाई करेंगे.‘ हिंदुस्तान लंबे समय से कह रहा है कि सईद  अजहर जो आतंकवादी संगठन लशकर-ए-तैयबा (एलईटी)  जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के मुखिया हैं वह हिंदुस्तान में आतंकवाद फैलाते हैं, वह पाकिस्तानी सेना के प्रतिनिधि हैं.

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2008 में हुए मुंबई हमलों के पीछे एलईटी का  2016 में वायुसेना के पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले के पीछे जेईएम का हाथ था. कई आतंकवादी हमलों की वजह से हिंदुस्तान पाक के बीच होने वाली शांति बातचीत स्थगित कर दी गई. हिंदुस्तान का साफ कहना है कि आतंकवाद  वार्ता साथ-साथ नहीं चल सकते हैं. सेनाध्यक्ष ने कहा, ‘जब कश्मीर में कुछ गलत होता है तो आप सभी इंडियन सेना को तुरंत दोषी ठहराते हैं. क्यों पाकिस्तानी सेना को दोषी नहीं ठहराते जो लोगों को उकसा रही है?’

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