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कांग्रेस में एक बार फिर जोश की लहर, PM मोदी के विरूद्ध वाराणसी से मैदान में उतार सकती है प्रियंका गांधी

प्रियंका गांधी वाड्रा को आकस्मित से सक्रिय पॉलिटिक्स का भाग बनाकर कांग्रेस में एक जोश की लहर दौड़ गई है. इसकी एक वजह कांग्रेस में समय-समय पर उठती मांग है. पार्टी के कई महान नेता प्रियंका को पॉलिटिक्स में लाने की बात करते रहे हैं. अब अटकले हैं कि पार्टी उन्हें पीएम नरेंद्र मोदी के विरूद्ध वाराणसी से मैदान में उतार सकती है. पार्टी के वरिष्ठ नेता  पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल के ट्वीच से तो यही इशारा मिल रहा है.

गुरुवार को कपिल सिब्बल ने ट्वीट कर कहा, मोदीजी  अमित शाह ने कांग्रेस पार्टी मुक्त हिंदुस्तान का आह्वान किया था. प्रियंका गांधी की अब यूपी (पूर्वी) की पॉलिटिक्स में आने से हम देखेंगे  मुक्त वाराणसी?  मुक्त गोरखपुर? राजनीतिक गलियारों में इन दिनों अटकले हैं कि प्रियंका को पूर्वी उत्तर प्रदेश की किसी सीट से चुनावी मैदान में उतारा जाएगा. इस तरह की चर्चाओं का भी मार्केट गर्म है कि उन्हें पीएम मोदी के विरूद्ध पार्टी वाराणसी से अपना चेहरा बना सकती है.

प्रियंका को पार्टी ने पूर्वी उत्तर प्रदेश की कमान सौंपी है. उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव भी बनाया गया है. बुधवार को राहुल गांधी ने मीडिया से वार्ता में बोला था कि कांग्रेस पार्टीउत्तर प्रदेश में अब फ्रंटफुट पर खेलेगी. अभी तक प्रियंका केवल रायबरेली  अमेठी की लोकसभा सीटों पर चुनाव प्रचार किया करती थीं.  मगर इस बार उन्हें बीजेपी का गढ़ माने जाने वाले पूर्वी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी दी गई है. प्रियंका की सक्रिय पॉलिटिक्स में एंट्री पर बीजेपी के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने तंज कसते हुए बोला है कि अब केवल जीजाजी रह गए हैं. उन्होंने ट्विटर पर लिखा, ‘बस अब जीजाजी ही तो बाकी रह गए है, उनको कोषाध्यक्ष बना दीजिए.

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बता दें कि प्रियंका को उत्तरप्रदेश के उस हिस्से का प्रभारी बनाया गया है जहां से आठ लोग पीएम बन चुके हैं. मौजूदा पीएम नरेंद्र मोदी भी वाराणसी से सांसद है. योगी आदित्यनाथ भी गोरखपुर से पांच बार के सांसद रह चुके हैं. कांग्रेस पार्टी राज्य में बुरे दौर से गुजर रही है. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में पार्टी को महज 7 सीटें  6.25% वोट ही मिले थे. लोकसभा चुनाव में भी पार्टी बस रायबरेली  अमेठी की सीट ही जीत पाई थी. राज्य में बीजेपी की गवर्नमेंट है  चुनावी रैलियों के दौरान प्रियंका ही निशाने पर होंगी. प्रियंका के सामने न केवल इन हमलों से पार पाने की चुनौती होगी बल्कि उन्हें मोदी  योगी को उनके ही गढ़ में घेरना होगा.

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