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इस देश में महिला इंजीनियरों की बेरोजगारी

एक अध्ययन में खुलासा हुआ है कि भारत में महिला इंजीनियरों की बेरोजगारी दर पुरुषों की तुलना में पांच गुना है और देश के कई हिस्सों में ये दर लगातार बढ़ रही है। अध्ययन में जो आंकड़े सामने आए हैं उसके मुताबिक भारत में ‘वेस्टर्न इंजीनियरिंग कंपनियों’ के लिए काम करने वाली भारतीय महिलाओं और पुरुषों में लिंग पक्षपात के अनुभवों की बात सामने आई है। स्टडी के मुताबिक देश में दोनों जेंडर्स अलग-अलग स्तरों पर पक्षपात का अनुभव करते हैं।

स्टडी में आए चौंकाने वाले आंकड़ें

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रिपोर्ट के मुताबिक, “महिलाओं को लिंग पक्षपात के अनुभव की ज्यादा संभावना है, जबकि पुरुषों के साथ ये पक्षपात होता है कि वो कहां से आते हैं और कौन सी भाषा बोलते हैं।” ये रिपोर्ट द सोसाइटी ऑफ वीमेन इंजीनियर्स के साथ कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के वर्कशॉप लॉ सेंटर फॉर वर्कलाइफ़ लॉ की साझेदारी में और हेस्टिंग्स कॉलेज ऑफ लॉ के साथ मिलकर तैयार की गई है। ‘वॉकिंग द टाइटरोप’ शीर्षक के अध्ययन के अनुसार, 44 फीसदी पुरुषों और 30 फीसदी महिला इंजीनियरों ने बताया कि उन्हें अपने राज्य या क्षेत्र की वजह से पक्षपात का सामना करना पड़ता है। राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण का आयोजन साल 2017 के शुरूआत में ऑनलाइन किया गया था, इसमें अलग-अलग इंजीनियरिंग क्षेत्रों और रोजगार स्तरों के 693 इंजीनियरों के क्रॉस सेक्शन शामिल हुए।

महिलाओं और पुरुषों में लिंग पक्षपात के अनुभवों की बात सामने आई

भारतीय प्रबंधन संस्थान, उदयपुर की फैकल्टी और द सोसाइटी ऑफ वीमेन इंजीनियर्स स्टडी की सलाहकार नीति सनन ने कहा, “रिपोर्ट पक्षपात की समस्याओं को रेखांकित करती है जो भारत के इंजीनियरिंग कार्यस्थल के अनुभवों को दर्शाती है। ये सोचने का मुद्दा है। यह ऑर्गेनाइजेशन के लिए गंभीर मुद्दों को सुलझाने का समय है। अध्ययन के अनुसार, 76 फीसदी इंजीनियरों ने बताया कि उन्हें अपने सहयोगियों के समक्ष सम्मान पाने के लिए खुद को बार-बार साबित करना पड़ता है। पक्षपात के मामले में 45 फीसदी महिलाओं ने रिपोर्ट किया कि उन्हें अपनी महिला सहयोगियों के साथ प्रतिस्पर्धा करनी होती है जिससे एक “महिला को जगह” मिल सके।

स्टडी में खुलासा- देश में महिला और पुरुष पक्षपात का करते हैं अनुभव

हेस्टिंग्स कॉलेज ऑफ लॉ के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में कार्यवाहक विधि के संस्थापक निदेशक, जोएन सी विलियम्स ने कहा, “हमें महिला इंजीनियरों को ऑर्गेनाइजेशन के अभिन्न अंग के रूप में सोचना शुरू करना चाहिए और उनके साथ पुरुष समकक्ष की तरह ही व्यवहार किया जाना चाहिए।” अध्ययन में कहा गया कि 11 फीसदी महिला इंजीनियरों और 6 फीसदी पुरुष इंजीनियरों ने अवांछित तरीके से सेक्सुअल अटेंशन या कार्यस्थल में अनुचित तरीके से छूने की जानकारी मिली है।

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