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बड़ीखबर: गंगासागर में महिलाओं की इज्जत से खिलवाड़

कोलकाता से सटे दक्षिण 24 परगना के गंगासागर में मकर संक्रांति के दिन पुण्य स्नान करने के लिए पहुंचे 30 लाख लोगों में शामिल महिलाओं की इज्जत के साथ खिलवाड़ का एक सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। पता चला है कि सुरक्षा के लिहाज से जिला प्रशासन द्वारा लगाए गए ड्रोन को काफी कम ऊंचाई पर उड़ा कर नहाती और कपड़े बदलती महिलाओं की तस्वीरें कैद की जाती रही और बार-बार प्रशासन को इस बारे में जानकारी देने के बावजूद पुलिस और अन्य अधिकारी निष्क्रिय बने रहे। हालांकि बाद में जब जिलाधिकारी वाई रत्नाकर राव की नजर इस पर पड़ी तो उन्होंने ड्रोन को तत्काल रोकने का आदेश जारी किया और बाद में उसे एक तय ऊंचाई पर उड़ाने को कहा। घटना सोमवार की ही है लेकिन मंगलवार को इस बारे में खुलासा हो सका है।

बताया गया है कि सुरक्षा कारणों से सागरमेला में निगरानी ड्रोन उड़ रहा था| लेकिन, वह बहुत नीचे उड़ रहा था। उसमें महिलाओं को नहाते और कपड़े बदलते हुए तस्वीरें रिकॉर्ड हो रही थी। सोमवार निगरानी के समय, दक्षिण 24 परगना के जिला कलेक्टर वाई रत्नाकर राव ने जब यह देखा तो उन्होंने इसे तुरंत रोकने का आदेश दिया। बाद में राज्य सरकार के पब्लिक हेल्थ टेक्निकल ऑफिस द्वारा ड्रोन को आखिरकार एक उच्च स्तर से निगरानी चलाने के लिए निर्देशित किया गया।

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जिला शासक वाई रत्नाकर राव ने कहा, ‘जो लोग ड्रोन को नियंत्रित कर रहे थे, वे अच्छी तस्वीरें लेने के लिए कम ऊंचाई पर उड़ा रहे थे। इन सभी मामलों में, ड्रोन को हर समय एक निश्चित ऊंचाई पर उड़ना पड़ता है। यह आदेश पहले दिया गया था।’

हालांकि ड्रोन उड़ाने वालों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई, इस बारे में पूछने पर रत्नाकर राव ने कहा कि, ‘ड्रोन को कम ऊंचाई पर इसलिए उड़ाया जा रहा था ताकि सुरक्षा के लिहाज से बेहतर तस्वीरें ली जा सके लेकिन अच्छी तस्वीरें हमेशा जरूरी नहीं होती। नियमों का पालन करना भी बहुत महत्वपूर्ण है। लोगों की निजता का भी सम्मान किया जाएगा। इसलिए इसे तत्काल उड़ाने पर रोक लगा दी गई थी और ऐसा दोबारा नहीं करने की चेतावनी दी गई है।’

आखिर हुआ क्या था?

– जिन लोगों ने इस ड्रोन उड़ाने का विरोध किया उनके अनुसार सोमवार तक करीब 25 से 27 लाख लोग गंगा सागर तट पर पहुंच चुके थे जो विभिन्न संस्थाओं द्वारा लगाए गए शिविरों में ठहरे हुए थे। वह वहीं पर खा, पी और स्नान आदि कर रहे थे। सोमवार सुबह के समय स्नान की शुरुआती घंटों में समुद्री तट की निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा था। एक स्वैच्छिक संगठन के एक सदस्य ने कहा कि महिलाओं के लिए नहाने और कपड़े बदलने के लिए एक घेरा बनाया गया था जिसकी कोई छत नहीं थी। उसी घेरे में महिलाएं नहा भी रही थीं और कपड़े भी बदल रही थीं। उन क्षेत्रों में ड्रोन बहुत कम ऊंचाई पर उड़ रहा था।

कुछ महिलाओं ने ड्रोन को काफी कम ऊंचाई पर उड़ते हुए देखकर आपत्ति दर्ज कराई और स्वयंसेवी संगठनों के पास शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद विभिन्न संस्थाओं के लोगों ने पुलिस अधिकारियों को इस मामले की जानकारी दी और ड्रोन को तत्काल उड़ने से रोकने की गुहार लगाई| लेकिन किसी ने एक नहीं सुनी। प्रशासनिक सूत्रों ने बताया कि कुछ देर बाद दैनिक निगरानी के लिए कलेक्टर वाई रत्नाकर राव कंट्रोल रूम में पहुंचे। जैसे ही उन्होंने ड्रोन कैमरे की तस्वीर देखी, तुरंत उन्हें गुस्सा आ गया| उन्होंने कार्यकर्ताओं से ड्रोन को रोकने के लिए कहा। बाद में यह आदेश जारी किया गया कि ड्रोन को हर समय एक विशिष्ट ऊंचाई पर रखा जाए। सार्वजनिक स्वास्थ्य तकनीकी विभाग के कार्यकारी अभियंता देबजीत कुंडू ने कहा, मुझे इस तथ्य के बारे में नहीं पता था| मैं दूसरी तरफ था। अगर ऐसा होता है तो यह गलत है। मैं देखूंगा कि ऐसा दोबारा नहीं हो। ”

मंगलवार को पता चला है कि यह ड्रोन एक प्राइवेट संस्था द्वारा उड़ाया जा रहा था जिसे जिला प्रशासन ने सुरक्षा निगरानी के लिए नियुक्त किया है। लाखों महिला पुण्यार्थियों की इज्जत के साथ खिलवाड़ पर भी जिला प्रशासन केवल चेतावनी देकर शांत बना हुआ है| इसे लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि निगरानी के लिए ड्रोन उड़ाना गलत नहीं है लेकिन इतनी कम ऊंचाई पर उड़ाना कि महिलाओं के नहाने और कपड़े बदलने की सारी तस्वीरें कैद हो जाए यह अपराध है।

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