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काशी के प्रयाग घाट पर ‘हर हर गंगे’

शाही स्नान का पुण्य लाभ लेने कि लिए मंगलवार को लोगों का रेला उमड़ पड़ा। मकर संक्रांति के पर्व पर वैसे तो पूरे दुनिया से इस वक्त प्रयागराज के अर्ध कुंभ में स्नान कर रहे लोग अपने आपको धन्य मान रहे हैं। मकर संक्रांति के पर्व पर देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालु गंगा में डुबकी लगाकर अन्न दान किया। साथ-साथ यहां आने वाले श्रद्धालु द्वादश ज्योतिर्लिंग का जलाभिषेक किया। काशी प्रयाग घाट के नाम से जाना जाने वाला घाट वह स्थान है जहां मकर संक्रांति और तमाम ऐसे धार्मिक पर्व पर गंगा स्नान करने से गंगा जमुना सरस्वती के त्रिवेणी संगम स्नान के बराबर फल मिलता है और सभी पाप से मुक्ति मिलती है। मेले में श्रद्धालुओं ने हर-हर गंगे के उद्घोष के साथ नदी में डुबकी लगाई।

सूर्योदय के पहले ही गंगा किनारे लगा भक्तों का तांता

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सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने की इस खास तिथि पर वाराणसी के दशाश्वमेध घाट, शीतला घाट, पंचगंगा घाट, आदि केशव, अस्सी घाट, मुंशी घाट और प्रयाग घाट पर सूर्य की पहली किरण सभी श्रद्धालुओं का तांता गंगा में डुबकी लगाने के लिए भोर से ही चुका था। उसके बाद जैसे ही भगवान भास्कर की लालिमा आकाश में फैली वैसे ही गंगा सेवा निधि के ब्राह्मण प्रातः सूर्य की आरती और घंटे घड़ियाल बजने लगे। वहीं मकर संक्रांति पर आने वाले श्रद्धालु गंगा में डुबकी लगानी शुरु कर दी। इसके साथ-साथ लोगों ने घाट पर आज के दिन अन्न दान किया।

धर्माचार्य संजय शास्त्री ने बताया कि वैसे तो महाकुंभ और कुंभ में मकर संक्रांति के दिन स्नान करने का विशेष महत्व है। शिव की नगरी काशी में क्योंकि यहां उत्तर वाहिनी बहती है, ऐसे में प्रयाग घाट पर स्नान करने वाले को प्रयागराज और संगम स्नान के बराबर का फल प्राप्त होता है तो सभी दोषों से मुक्ति भी मिलती है।

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