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इस खेल को बैन करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट चली गई थी ये संस्था

 मकर संक्रांति के मौके पर गंगा घाटों पर श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाने में मशहूल हैं. वहीं तमिलनाडु में सूर्य उपासना का त्योहार पोंगल मनाया जा रहा है. मकर संक्रांति के मौके पर तमिलनाडु में मदुरै के अवनियापुरम में सांडों को काबू में करने के परम्परागत खेल ‘जल्लीकट्टू’ का आयोजन किया गया है. पोंगल की शुरुआत के साथ ही मदुरै में जल्लीकट्टू का खतरनाक खेल खेलने के लिए युवा अखाड़े में नजर आए.

सरकार ने जारी किए नए नियम
मदुरै में आयोजित किए गए इस खेल में इस बार सरकार की ओर से नए नियम लागू किए गए हैं. जल्लीकट्टु में हिस्सा ले रहे सभी सांडों के नाम पर टोकर जारी किए गए हैं, ताकि हानि की संभावना न के बराबर हो. राज्य सरकार ने ये नोटिफिकेशन पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा 2 और 2017 के संशोधित अधिनियम के तहत जारी किया है.

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सुप्रीम कोर्ट ने खेल पर लगाया रोक
इस खेल में अक्सर देखा जाता है कि कई बार प्रतिभागी अपनी जान तक गंवा देते हैं. जानवरों की सुरक्षा करने वाली संस्था पेटा इस खेल को बैन करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट चली गई थी, जिसके बाद 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने इस खेल पर बैन लगा दिया था, लेकिन 2016 में केंद्र सरकार ने लोगों के प्रदर्शन को देखते हुए एक अधिसूचना जारी कर इस खेल में बैलों के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी थी, लेकिन केंद्र सरकार की इस अधिसूचना के खिलाफ कुछ ही दिन बाद अधिसूचना को रद्द करने की याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई.

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