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भारत लाया जा सकता है आतंकी तहव्‍वुर हुसैन राणा

मुंबई पर हुए आतंकी हमलों 26/11 के मुख्‍य साजिशकर्ता त‍हव्‍वुर हुसैन राणा को अमेरिका से प्रत्‍यर्पित करके भारत लाया जा सकता है। राणा इस समय अमेरिका में 14 वर्षों की सजा काट रहा है। इस मामले से परिचित सूत्रों की ओर से इस बात की जानकारी दी गई है। भारत सरकार, राणा को भारत लाने की कोशिशों के तहत ट्रंप प्रशासन के साथ पूरी सक्रियता के साथ मिलकर सहयोग कर रही है। पाकिस्‍तान मूल का राणा कनाडा का नागरिक है और दिसंबर 2021 को उसकी सजा खत्‍म होगी। सजा खत्‍म होने से पहले उसे भारत लाने की कोशिशों के लिए सभी जरूरी पेपरवर्क को पूरा किया जा रहा है।

साल 2009 में हुआ था गिरफ्तार

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राणा को साल 2009 में मुंबई आतंकी हमलों के आरोपों के चलते गिरफ्तार किया गया था। इन हमलों में 166 लोगों की मौत हो गई थी जिसमें कुछ अमेरिकी नागरिक भी शामिल थे। हमलों को पाकिस्‍तान से आए लश्‍कर-ए-तैयबा के 10 आतंकियों ने अंजाम दिया था। जहां नौ आतंकियों को कार्रवाई में ढेर कर दिया गया था तो वहीं अजमल कसाब को एजेंसियों ने जिंदा पकड़ा था। कसाब को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी और साल 2012 में उसे फांसी पर लटका दिया गया था।

साल 2013 में सुनाई गई सजा

साल 2013 में राणा को 14 वर्ष की सजा सुनाई गई थी। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक राणा दिसंबर 2021 में रिहा हो जाएगा। मामले से जुड़े एक सूत्र ने न्‍यूज एजेंसी पीटीआई को जानकारी दी है, ‘इस बात की काफी संभावनाएं हैं कि सजा पूरी होने पर राणा को भारत लाया जाएगा। अमेरिका और भारत इस दिशा में मिलकर काम कर रहे हैं।’ हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि जरूरी कागजी कार्रवाई इसमें सबसे बड़ी चुनौती है और इसके अलावा अफसरशाही से निबटना भी अपने आप में एक कड़ा लक्ष्‍य है। वहीं एक निष्‍पक्ष न्‍यायिक आयोग भी अपने आप में काफी मुश्किल है।

दोनों देशों के मंत्रालय कर रहे काम

भारत के विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय के अलावा कानून मंत्रालय और अमेरिका विदेश मंत्रालय के अलावा न्‍यायिक विभाग सभी विभाग राणा के प्रत्‍यर्पण पर मिलकर काम कर रहे हैं। कहा जा जब प्रत्यर्पण की बात आती है तो वे अपनी प्रक्रिया को ना धीमा करना चाहते हैं और ना ही तेज करना चाहते हैं। भारतीय दूतावास और राणा के वकील ने हालांकि इस पर कोई टिप्पणी नहीं की। हाल ही में नेशनल इनवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) के अधिकारी अमेरिका के दौरे पर गए थे। इस दौरे का मकसद दोनों देशों में मौजूद ब्‍यूरोक्रेटिक प्रक्रिया को कम करके राणा की सजा पूरी होने से पहले जरूरी कार्रवाई को निबटना था।

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