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7 बेटियों ने बेटा बनकर दिया मां की अर्थी को कंधा

गुजरात में राजकोट जिले में बेटियों ने ऐसा काम किया है, जिसकी लोग अब मिसाल दे रहे हैं। रीति-रिवाजों में जहां मां-बाप की अर्थी को कंधा देने की जिम्मेदारी बेटों पर डाली गई है, वहीं यहां 7 बेटियों ने इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाया। जिसे देख लोग भावुक हो गए। इन सातों बेटियों ने मां की अर्थी को कंधा दिया और श्मशान प्रस्थान किया। जहां परंपरा के अनुसार माता को अग्निदाह देकर बेटियों द्वारा ही उसका अंतिम संस्कार भी किया गया।

यह सब जानते ही होंगे कि हिंदू-धर्म में पुत्र द्वारा ही अपने माता-पिता के अंतिम संस्कार करने की परंपरा है, वहीं औरतों का श्मशान जाना भी वर्जित है। मगर, राजकोट में जब एक वृद्धा की मौत हुई तो बेटियां ही अंतिम संस्कार के लिए आगे आईं। जानकारी के अनुसार, शहर के शक्ति पार्क विस्तार में बीते कल 82 वर्षीय मधुबेन परमार नाम की एक महिला चल बसी थी। मधुबेन को संतान में कोई पुत्र नहीं, बल्कि 7 बेटियां ही थीं। ऐसे में इन सभी बेटियों ने बेटा होने का फर्ज निभाया।

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बेटियों ने न सिर्फ ना सिर्फ अपनी माता की अर्थी को कंधा दिया बल्कि श्मशान जाकर परंपरानुसार माता को अग्निदाह देकर उसका अंतिम संस्कार किया। इस दौरान वहां मौजूद सभी लोग भावुक हो उठे। कुछ ने उन्हें मिसालें दीं तो कुछ ने उन्हें पुत्री के रूप में पुत्र कहा। उन्हें देखकर सब की आंखों से आंसू बहने लगे।

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