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हरियाणा के जाट सुधारने में जुटे राहुल गांधी

हरियाणा से विधायक होने के बाद भी कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने मीडिया विभाग के प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला को जींद विधानसभा उपचुनाव में उम्मीदवार क्यों बनाया ये सवाल पार्टी के भीतर  बाहर उठ रहा है. दरअसल रणदीप को जींद से चुनाव लड़ाने के पीछे एक रणनीति बताई जा रही है. राहुल गांधी हरियाणा के जाट लैंड यानी जाट बाहुल्य इलाकों में लोकप्रिय जाट चेहरा पेश कर ऐसा बीज बोना चाहते हैं जिसकी फसल भविष्य में अन्य राज्यों में भी काटी जा सके.
हरियाणा की पॉलिटिक्स में वर्तमान समय में बिखरे चौटाला परिवार  उसके असर वाली जींद सीट पर अजय  अभय चौटाला ने अपने-अपने उम्मीदवार उतारे हैं. जींद विधानसभा सीट इनेलो के विधायक के निधन से खाली हुई है. बीजेपी को लेकर जाटों में नाराजगी बताई जाती है लिहाजा कांग्रेस पार्टी इस मौके को चूकना नहीं चाहती है.

सूत्रों की मानें तो कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष के पास जींद सीट के लिए बेहतर चेहरा न होने के साथ सीमित विकल्प थे. बताते हैं कि पहले भूपेंद्र सिंह हुड्डा को चुनाव लड़ने की पेशकश की गई लेकिन उन्होंने मना कर दिया  न ही प्रदेश अध्यक्ष कोई मजबूत नाम सुझा पाए. कांग्रेस पार्टी नेतृत्व राज्य में संदेश देने के लिए ये चुनाव हर हाल में जीतना चाहता है  जींद से किसी जाट को ही उम्मीदवार बनाया जाना था. लिहाजा हरियाणा की पॉलिटिक्स में जरूरी इस केंद्र से कोई बड़ा नाम न होने पर रणदीप सुरजेवाला को मैदान में उतारा गया.

बतौर विधायक हरियाणा की पॉलिटिक्स में खासे सक्रिय हैं सुरजेवाला

जींद में कांग्रेस पार्टी को जीत मिलती है तो तय है कि भविष्य में रणदीप कांग्रेस पार्टी के CM पद के प्रबल दावेदार होंगे. रणदीप बतौर विधायक अभी हरियाणा की पॉलिटिक्स में सक्रिय रहे हैं  हफ्ते के दो दिन वे अपने इलाके में रहते हैं. हरियाणा की पॉलिटिक्स में लोकल निकाय चुनावों के बाद फिर करवट ली है. कांग्रेस पार्टी के भीतर इन चुनावों की समीक्षा हो रही है.हुड्डा के असर वाले एरिया में भी कांग्रेस पार्टी कोई बेहतर प्रदर्शन नहीं कर सकी है. जिस तरह गवर्नमेंट की ओर से हुड्डा पर शिकंजा कसा जा रहा है उसे भी ध्यान में रखकर विकल्प तैयार किए जा रहे हैं.

कांग्रेस पार्टी को भय है कि लोकसभा चुनाव में बीजेपी हरियाणा में फिर से जाट बनाम अन्य जातियों का चुनाव बनाना चाहेगी. ऐेसे में सुरजेवाला ऐसा चेहरा है जिसकी पहचान अन्य बिरादरियों में भी है. राज्य में अलग-थलग पड़े प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर भी सुरजेवाला के साथ हो लिए हैं. हुड्डा एंड फैमिली के साथ उनके बेकार संबंध जगजाहिर हैं  इसका नुकसान पार्टी संगठन में भी हुआ है.

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