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पांड्या-राहुल की विवादित बयान के बाद बढ़ सकती हैं मुश्किलें

टीम इंडिया के खिलाड़ी हार्दिक पांड्या और लोकेश राहुल की विवादित बयान के बाद मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. प्रशासकों की समिति (सीओए) के प्रमुख विनोद राय के बाद अब डायना इडुल्जी ने भी दोनों खिलाड़ियों के निलंबन की सिफारिश की है. हालांकि सीओए की सदस्य डायना ने आगे की कार्रवाई पूरी होने तक निलंबन की सिफारिश की है. बीसीसीआई की विधि टीम का कहना है कि पांड्या विवादित टिप्पणी से आचार संहिता का उल्लंघन नहीं हुआ है. इस वजह से कार्रवाई में अब ज्यादा वक्त लगेगा. विनोद और डायना ने पांड्या-राहुल पर प्रतिबंध की सिफारिश को विधि विभाग के पास भेज दिया था.

इडुल्जी ने कानूनी सलाह लेने के बाद कहा, ‘‘यह जरूरी है कि दुर्व्यवहार पर कार्रवाई का फैसला लिए जाने तक दोनों खिलाड़ियों को निलंबित रखा जाए जैसा कि (बीसीसीआई) सीईओ (राहुल जौहरी) के मामले में किया गया था जब यौन उत्पीड़न के मामले में उन्हें छुट्टी पर भेजा गया था.’’

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बोर्ड की विधि कंपनी सिरिल अमरचंद मंगलदास की सिफारिशों के जवाब में इडुल्जी ने लिखा, ‘‘कानूनी राय के आधार पर और इस मुद्दे से निपटने के लिए अंतिम प्रक्रिया तय होने तक, सिफारिश की जाती है कि संभावित खिलाड़ियों और टीम को तुरंत यह सूचना भेजी जाए.’’

विधि फर्म ने स्पष्ट किया है कि पांड्या की अनुचित टिप्पणियां आचार संहिता के दायरे में नहीं आती. विधिक राय में लिखे के मुताबिक, ‘‘हमारा मानना है कि मौजूदा मामला आचार संहिता के उल्लंघन के दायरे में नहीं आता और मौजूदा हालात में आचार संहिता की प्रक्रिया को लागू नहीं किया जा सकता.’’

बीसीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इडुल्जी के नजरिये का समर्थन करते हुए कहा कि जांच लंबित रहने तक निलंबन होना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘‘यह आचार संहिता का मामला नहीं बल्कि संस्थान की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना है. जैसे कि आईसीसी ने गेंद से छेड़छाड़ के आरोपों में अपनी आचार संहिता के तहत स्टीव स्मिथ पर अधिकतम एक मैच का प्रतिबंध लगाया था.’’ अधिकारी ने कहा, ‘‘लेकिन खेल की प्रतिष्ठ को नुकसान पहुंचाने के लिए क्रिकेट आस्ट्रेलिया ने उन्हें एक साल के लिए प्रतिबंधित किया. जब आप उनकी मूर्खतापूर्ण टिप्पणी को देखते हैं तो बड़ी तस्वीर देखिए.’’

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