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बुंदेलखंड का किसान अब आंदोलन के मोड़ पर, राज्‍य सरकार के सामने रखी अपनी 8 मांगे

लंबे समय से बदहाली का शिकार रहा बुंदेलखंड का किसान अब आंदोलन के मोड़ पर आ खड़ा है. बुंदेलखंड के किसानों ने केंद्र और राज्‍य सरकार के सामने अपनी 8 मांगे रखी हैं. इन मांगों के साथ उन्‍होंने सरकार को चेतावनी भी दी है कि समय रहते मांगों को नहीं माना गया तो बुंदेलखंड का किसान बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होगा.

भारतीय किसान यूनियन (भानु) के बुंदेलखंड अध्‍यक्ष ठा. शिवनारायण सिंह परिहार ने बताया कि 8 जनवरी को बुंदेलखंड के किसानों की महापंचायत गयराहा (झांसी) के गौरय्या इंटर कालेज प्रांगण में बुलाई गई थी. महापंचायत में शामिल हुए किसानों ने आपसी चर्चा के बाद अपनी 8 मांगें तय की हैं. इन मांगों में कर्ज माफी, मुफ्त बिजली-पानी, फसल की उचित कीमत की मांग को भी शामिल किया गया है.

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उन्‍होंने बताया कि किसानों की केंद्र सरकार से पहली मांग है कि बुंदेलखंड ही नहीं, बल्कि देश के सभी किसानों का सरकारी कर्ज माफ किया जाए. इसके अलावा, 60 की उम्र पार कर चुके किसानों को सरकार 5 हजार रुपए प्रति माह की पेंशन दे. इस पेंशन के बंटवारे में किसी तरह का भेदभाव न हो. इसके अलावा, किसानों को यह हक दिया जाए कि वह अपनी फसलों का मूल्‍य खुद निर्धारित कर सकें.

उन्‍होंने बताया कि बुंदेलखंड में आवारा जानवर फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं. लिहाजा, किसानों की फसल को सुरक्षित रखने के लिए प्रत्‍येक ग्राम पंचायत में गौशाला का निर्माण कराया जाए. किसानों की मांग है कि बुंदेलखंड के किसानों को बिजली, पानी मुफ्त में दिया जाए. सिंचाई हेतु सरकारी ट्यूबबेल लगवाए जाएं. नहरों में पानी खेत तक पहुंचाया जाए. किसानों की सरकारी वसूली पर रोक लगाई जाए.

किसानों की मांग है कि बुंदेलखंड में जिन किसानों की जमीन हाईवे बनाने के लिए अधिग्रहित की जा रही हैं. उन किसानों को नए सर्किल रेट से मुआवजा दिया जाए. बीमा कंपनियों को आदेश दिया जाए. कि किसानों की फसलों की क्षतिपूर्ति हेतु किसानों को सही बीमा क्‍लेम दिया जाए. प्रधानमंत्री आवास योजना, स्‍वच्‍छ शौचालय की योजना को किसानों तक सीमित किया जाए.

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